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बेटी को अवसर मिले तो बनती सरताज

Sun, 11 Oct 2015 01:38 AM IST
सुरभि गुप्ता/अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। ‘अंतरिक्ष तक का सफर, करें बेटियां आज, न ही वो मजलूम हैं, न ही वो मोहताज’, कवि राजेश कुमार की ये पंक्तियां बेटियों के हौसले की उड़ान की कहानी बखूबी कहती हैं। किशोरावस्था की कई बेटियों ने साबित किया है कि अच्छे संस्कार और मां की अच्छी सीख मिले तो कला, विज्ञान, खेल, शिक्षा, समाज, राजनीत सहित जीवन के किसी भी क्षेत्र में उपलब्धि और नए मुकाम हासिल करने में वे किसी से पीछे नहीं हैं। कई बेटियों तो सिर्फ बेटियों नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बनी हैं।
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वहीं समाज का एक वर्ग ऐसा भी है जिसमें चाहकर भी प्रतिभासम्पन्न बेटियों को उनकी राह नहीं मिलती है। उन्हें आगे बढ़ने में तरह-तरह की दिक्कतें आती हैं, भले ही वह उस विधा में कुशल और कमाल की हो। तमाम सामाजिक रीतियों या फिर असुरक्षा की दुहाई देकर  उसका आत्मविश्वास ऐसा डिगा दिया जाता है कि वह हौसला खो बैठती है। अल्लापुर के एक प्राइवेट स्कूल में नौंवी में पढ़ने वाली साक्षी के साथ ऐसा ही हुआ। अच्छी खिलाड़ी होने के बावजूद उसे क्रिकेट ट्रायल के लिए बाहर जाने का मौका नहीं मिला। बेटियों को भी अवसर मिले तो हर मंजिल पर वह आगे और आगे बढ़ने को तैयार हैं।

शांतिपुरम फाफामऊ निवासी और एमपीवीएम गंगागुरुकुलम की 12वीं की छात्रा सोनल सिंह ने न केवल आठवीं इंडियन नेशनल ब्रेन बी जीतकर पूरे देश में शहर और स्कूल का नाम रोशन किया बल्कि आस्ट्रेलिया में भारत की अगुवाई का अवसर भी हासिल किया। यहां पर उसने छठा स्थान प्राप्त किया। पिता जितेंद्र सिंह की किडनी की बीमारी और मानसिक उलझनों के बीच ब्रेनबी प्रतियोगिता में उसने सफलता के झंडे गाड़े।
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आर्यकन्या गर्ल्स इंटर कॉलेज की निधि का चयन नेशनल अंडर-19 क्रिकेट प्रतियोगिता में हुआ है। वह चंडीगढ़ में नेशनल अंडर 19 क्रिकेट प्रतियोगिता में अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगी। दायें हाथ की ओपनर बल्लेबाज निधि झांसी में हुई अंडर-19 बालिका प्रदेशीय क्रिकेट प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं।

टैगोर पब्लिक स्कूल की 12वीं की छात्रा अन्ना हसीन सीबीएसई इंटेल प्रतियोगिता में प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त कर चुकी हैं। प्रदेश के सभी सीबीएसई स्कूलों से चयनित 150 मॉडलों की दौड़ में अन्ना ने एंटी पॉल्यूशन डिवाइस बनाकर प्रदेश स्तर पर नाम रोशन किया। उसका मॉडल वातावरण में मौजूद प्रदूषण के तत्वों को डिटेक्ट करता है। वह नेशनल चिल्ड्रेन साइंस कांग्रेस में भी जिला स्तर पर नाम रोशन कर चुकी हैं।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की ओर से आयोजित राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में अपनी बौद्धिक क्षमता का परिचय देकर महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर की देवोलीना शर्मा ने छात्रवृत्ति प्राप्त की। उसे यह छात्रवृत्ति उच्च शिक्षा तक मिलेगी। इंटरनेशनल ओलम्पियाड फॉर इंग्लिश लेंगवेज में भी वह अपनी मेधा का परचम लहरा चुकी हैं।

अब भी बेटियों को भेद भाव, भाई की तुलना में कम महत्व देना, उच्च शिक्षा देने समेत कई विसंगतियों का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में तो अभिभावकों को भी बुला कर समझाया गया जबकि मौजूदा समय में उन्हें अपनी बेटियों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाना चाहिए क्योंकि उनके प्यार और विश्वास के भरोसे ही बेटियों को आगे बढ़ते रहने की हिम्मत मिलती है।
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0 सौम्या दीक्षित, मनोवैज्ञानिक काउंसलर
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