दशहरे पर दशानन का दहन, यानी समाजिक कुरीतियों और बुराइयों का दहन। इस संदेश के साथ हर साल रावण का पुतला जलाया जाता है लेकिन समाज में अब भी अव्यवस्था रूपी कई ‘रावण’ बचे हैं, जिनका दहन नहीं हो सका और आए दिए इनसे हमारा सामना भी होता रहता है। भर्तियों में घोटाले का मामला हो या पानी-सड़क जैसी मूलभूत जरूरतें, बदहाली का रावण समय के साथ ताकतवर होता जा रहा है और कमजोर सरकारी तंत्र इससे निपट पाने में नाकाम साबित हो रहा है। समस्या गिनने बैठें तो गिनती खत्म नहीं होगी लेकिन अगले साल दशहरे तक अगर दस समस्याएं भी दूर हो जाएं तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है।
भर्ती घोटालों की भेंट चढ़ा प्रतियोगियों का भविष्य
भर्ती संस्थाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार और अराजकता ने युवाओं को अंधकार में धकेल दिया है। हर भर्ती पर विवाद है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्तियां चार वर्षों से लगातार सवालों के घेरे में हैं। न्यायालय के आदेश पर आयोग को कई भर्तियों का रिजल्ट संशोधित करना पड़ा। सिपाही, दरोगा समेत कई अन्य भर्तियों के परिणाम भी बदलने पड़े। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में सात साल से कोई भर्ती ही नहीं हुई है। एक बार फिर आयोग में कोरम का संकट खड़ा हो गया है। इसकी वजह असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्तियां फिर फंस गई हैं। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड समेत अन्य संस्थाओं की भर्तियाें का भी यही हाल है। निराश प्रतियोगियों को अब उस राम का इंतजार है, जो भ्रष्टाचार और अहंकार रूपी इस रावण का वध कर सकें।
‘हे प्रभु’ सुधार दो ट्रेनों की लेटलतीफी
सोशल मीडिया की मदद से यात्रियों की छोटी सी छोटी समस्याओं का समाधान करने का दावा करने वाले रेलमंत्री सुरेश प्रभु ट्रेनों की लेटलतीफी रोकने में अब तक सफल नहीं हो सके। उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के इलाहाबाद मंडल की बात करें तो देश भर में ट्रेनों की लेटलतीफी में यह अव्वल है। लेटलतीफी की वजह से हर रोज हजारों की संख्या में यात्रियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। अभी हाल ही में इलाहाबाद डिवीजन ने जो आंकड़े, पेश किए हैं उसमें बताया गया है कि 50 से 55 फीसदी ट्रेनें ही समय पर चल रही हैं। यात्री निराश हैं। वे चाहते हैं कि लेटलतीफी वाले इस ‘दशानन’ का सुरेश प्रभु कब संहार करेंगे। ।
इलाज करने करने वाले अस्पताल खुद बीमार
प्रदेश सरकार चाहे जितने दावे कर ले लेकिन अस्पतालों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। मंडल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल स्वरूपरानी नेहरू में कई डॉक्टर्स ओपीडी में बैठते ही नहीं, दवाएं सिर्फ कागजों में बंटती हैं और दलाली चरम पर है वहीं बेली, कॉल्विन, डफरिन में कई जरूरी सुविधाएं अब तक बहाल नहीं हो सकी हैं। जांच केलिए संसाधन नहीं है। ट्रामा सेंटर शुरू नहीं हो सका। सीटी स्कैन, एमआरआई जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं बहाल नहीं हो पाईं। इलाज कराने के नाम पर मरीजों से वसूली की जा रही है। कमीशन के चक्कर में मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए मजबूर किया जा रहा है। निजी अस्पतालों पर ीाी कोई लगाम नहीं है। मनमाने तरीके से पैसा वसूला जा रहा है।
बच्चों की शुरुआती शिक्षा पर ही ‘रावण’ का साया
बच्चों की शुरुआती शिक्षा पर भी ‘रावण’ का साया पड़ गया है। प्राथमिक स्कूलों में बंदतजामी बच्चों की शिक्षा पर भारी पड़ रही है। सोहबतियाबाग प्राथमिक विद्यालय सिर्फ एक कमरे में चल रहा है। जहां बच्चे पढ़ते हैं, वहीं भोजन पकाया जाता है। स्कूल में गाय-भैंस बंधी रहती हैं। एक शौचालय तक नहीं है। रेलवे लाइन का दोहरीकरण चल रहा है। इसके लिए स्कूल की जमीन ली जाएगी, स्कूल टूट जाएगा और बच्चों की पढ़ाई छूट जाएगी। अलोपीबाग पूर्व माध्यमिक विद्यालय विद्यालय में पानी-बिजली नहीं। शौचालय टूटा है और मिड डे मील की गुणवत्ता घटिया है। दारागंज प्राइमरी विद्यालय में बिजली का कनेक्शन नहीं है। शौचालय क्षतिग्रस्त है। यहां भी घटिया गुणवत्ता का मिड डे मील मिल रहा है। मफ्फोर्डगंज, एलगंज समेत कई प्राथमिक विद्यालय ऐसे ही बदहाल पड़े हैं।
जाम के झाम में फंसे शहरी
शहर में जाम की गंभीर समस्या है। पटरी पार पुराने शहर में जानसेनगंज, चौक, बहादुरगंज, लीडर रोड, विवेकानंद मार्ग पर हर वक्त जाम लगा रहता है। इलाहाबाद जंक्शन के सामने से नूरुल्ला रोड और काटजू रोड, खुल्दाबाद चौराहा पर भी यही स्थिति है। बेहद घनी आबादी और व्यस्त बाजार वाले इन इलाकों की सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस कभी नजर नहीं आती। नतीजा कि कारें, रिक्शा, ई-रिक्शा जाम का कारण बनते हैं। सिविल लाइंस में महात्मा गांधी मार्ग, कटरा में भी कमोवेश यही स्थिति है। व्यस्त बाजारों में बड़ी-बड़ी गाड़ियां लेकर लोग पहुंचते हैं, जिन्हें कोई रोकने वाला नहीं है। रामबाग रेलवे क्रासिंग, हाईकोर्ट पानी टंकी, सीएमपी डिग्री कॉलेज के सामने भी जाम की गंभीर समस्या है।
अतिक्रमण बना जी का जंजाल
अतिक्रमण शहर में बड़ी समस्या है। जानसेनगंज चौराहा से घंटाघर चौराहा और वहां से लोकनाथ और कोतवाली की ओर जाने वाली सड़कों के दोनों ओर दुकानें खुलने के बाद पटरी गायब हो जाती है। नखास कोहना चौराहा से लोकनाथ होकर सुलाकी चौराहा तक भी यही स्थिति है। यहां के दुकानदारों पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं है। दुकान का आधे से ज्यादा सामान तो बाहर पटरी पर सजाया जाता है। कटरा में भी अतिक्रमण गंभीर समस्या है। नेतराम चौराहा से विश्वविद्यालय मार्ग चौराहा के बीच मुख्य बाजार की सड़क कहने को करीब 20 मीटर चौड़ी है लेकिन दुकानें खुलने के बाद यह बमुश्किल पांच मीटर रह पाती है। कटरा चौराहा से कचहरी रोड, लक्ष्मी चौराहा और मनमोहन पार्क की ओर जाने वाली सड़कों की भी यही स्थिति है। कपड़े, रजाई गद्दे, कूलर, साइकिल, जूते-चप्पल आदि की ज्यादातर दुकानें पटरी पर ही सजती हैं। कर्नलगंज में सब्जी मंडी से आनंद भवन तक, अल्लापुर में लेबर चौराहा के आसपास भी यही स्थिति है।
आवारा मवेशियों का ठिकाना सड़क, गलियां
शहर की मुख्य सड़कें हों या गलियां, आवारा मवेशियों का ठिकाना बन गई हैं। सिविल लाइंस में एलगिन रोड, कटरा मनमोहन पार्क, विश्वविद्यालय मार्ग चौराहा, कर्नलगंज थाने के आसपास, ममफोर्डगंज में आबकारी के आसपास, जगराम चौराहा, अल्लापुर में रामलीला मैदान, लेबर चौराहा, बाघम्बरी रोड, मीरापुर, अतरसुइया, लोकनाथ गली, शिवकुटी थाने के आसपास, बघाड़ा, सलोरी आदि की सड़क, गलियों में पूरे दिन गाय-भैंस घूमते और आराम फरमाते दिख जाएंगी। इनकी वजह से सड़क, गलियों में गंदगी के साथ आए दिन दुर्घटनाएं भी होती हैं। इनको शहर से बाहर करने के लिए कैटिल कॉलोनी आठ वर्ष पहले ही बन चुकी है लेकिन नगर निगम अब तक पशुओं को शहर से बाहर नहीं कर सका।
सड़कें बदहाल, कैसे चले वाहन
शहर की सड़कों की जो स्थिति है, ऐसी हालत बीते चार-छह साल में शायद ही कभी रही हो। दशहरा के ऐन पहले तक नगर निगम ने कुछ सड़कों पर पैचवर्क कर खानापूरी कर दी। सीवर लाइन बिछाने के लिए सिविल लाइंस, मुट्ठीगंज, अल्लापुर, गोविंदपुर, शिवकुटी आदि इलाकों में छह-सात माह पहले खोदी गई सड़कें अब तक नहीं बनी हैं। दशहरा के मद्देनजर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने मुट्ठीगंज में बड़ा चौराहा से हटिया चौराहा के बीच में सिर्फ सड़क के उस हिस्से का डामरीकरण किया, जितने में सीवर लाइन डाली गई थी। इसकी वजह से खराब हुई बाकी सड़क नहीं बनाई गई, जिस पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं और मंगलवार को इस सड़क से रामदल निकलना है।
दूषित जलापूर्ति से नहीं मिल रहा छुटकारा
शहर के कई इलाकों में दूषित जलापूर्ति की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। रामबाग, बाई का बाग, कीडगंज, साउथ मलाका में गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायत लगातार हो रही है लेकिन जलकल विभाग के अफसरों पर इसका जरा भी असर नहीं है। मीरापुर, अतरसुइया, दरियाबाद के कई मोहल्लों में घर-घर गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है। इन इलाकों में समस्या कहां है, विभाग के अफसर यह तक नहीं पता कर सके। शिकायत मिलने पर विभाग के कुछ कर्मचारी मौके पर जाते हैं। एक-दो स्थानों पर लीकेज के नाम पर गड्ढा खोदा जाता है और मरम्मत की खानापूरी कर कर्मचारी लौट जाते हैं लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
रेप और हत्या से दहल गई संगम नगरी
संगम नगरी में अपराध की बात करें तो गली-गली रावण घूम रहे हैं। बेटियां सुरक्षित नहीं है। करछना में नवरात्र के दौरान दुर्गापूजा देखकर घर लौटी बच्ची से रेप के बाद हत्या कर दी गई। लालपुर में भी पिछले दिनों रेप का मामला सामना आया। फूलपुर में नवरात्र के पहले दिन दुर्गापूजा देखकर घर लौट रही लड़की से गैंगरेप किया गया। नवरात्र से हफ्ते भर पहले मांडा में महिला से रेप का उसे जिंदा जला दिया गया। दरिंदगी के ये चंद उदाहरण हैं। इलाहाबाद में साल भर के दौरान रेप की 41 घटनाएं और रेप एवं हत्या की पांच घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है। ये आंकड़े लिखापढ़ी में हैं, न जाने कितनी घटनाएं पुलिस तक पहले से पहले ही दबा दी गईं या मामले में रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की गई।