लॉक डाउन में आर्थिक संकट से उबरने के लिए सरकार के डीए कटौती के निर्णय पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (ऑक्टा) ने कुछ मांगों के साथ सहमति जताई है। हालांकि, ऑक्टा के कुछ सदस्य सरकार के इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं।
ऑक्टा की रविवार को हुई ऑनलाइन बैठक में इस मुद्दे पर सदस्यों के बीच लंबी बहस हुई। सरकार के इस निर्णय के विरोध में पांच और समर्थन में दस लोगों ने अपने मत दिए। हालांकि ऑक्टा सदस्यों ने सरकार को कुछ सुझाव भी दिए। पहला सुझाव यह कि आर्थिक स्थितियां सुधरने के डीए में हुई कटौती एरियर के रूप में वापस की जाए। साथ ही यह सुझाव आया कि डीए में सिर्फ एक फीसदी की कटौती जाए और जुलाई-2020 एवं जनवरी-2021 जो डीए बढ़ोतरी देय होती है, उसमें भी केवल एक फीसदी की कटौती हो और बाकी का भुगतान किया जाए। ऑक्टा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आरी सिंह ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में डीए कटौती तो ठीक है लेकिन इससे पूर्व सभी संगठनों से सरकार को बात कर लेनी चाहिए थी।
अध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह एवं डॉ. धीरज चौधरी ने कहा कि डीए कटौती की धनराशि बाद में एरियर के रूप में लौटाने का आश्वासन देना चाहिए। ऑक्टा महासचिव उमेश प्रताप सिंह ने वर्तमान में असमान्य स्थिति को देखते हुए डीए कटौती एक जरूरी कदम है। इस समय हमें सरकार के साथ रहने की जरूरत है। डॉ. रणधीर सिंह ने कहा कि एक तरफ वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया था कि वेतन पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन निर्णय विपरीत लिया जा रहा है। महंगाई भत्ता स्थगित करने से पूर्व कर्मचारी संगठनों, आर्थिक विशेशज्ञों से विचार-विमर्श करके एक उचित निर्णय लेना चाहिए था।
ऑनलाइन बैठक के दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति की नियुक्ति में हो रहे विलंब पर भी चर्चा की गई। निर्णय लिय गया कि कुलपति की नियुक्ति के लिए ऑक्टा मंत्रालय को पत्र लिखेगा और मांग करेगा कि कुलपति की नियुक्ति जल्द की जाए। ऑक्टा ने यह मांग भी कि इस संदर्भ में इविवि को कार्य परिषद की ऑनलाइन मीटिंग बुलानी चाहिए। डॉ. धीरज ने कहा कि इविवि में मध्यकालीन विभाग अध्यक्ष विहीन है। कला संकाय के डीन का पद खाली है। इविवि एवं कॉलेजों में नियुक्ति अटकी पड़ी हैं और कार्यवाहक कुलपति को कोई चिंता नहीं है। बैठक में कॉलेज की परीक्षाओं के संदर्भ में निर्णय गया कि यूजीसी और इविवि की ओर से निर्णय लिए जाने के बाद ही इस पर विचार किया जाएगा। ऑक्टा परीक्षा नियंत्रक पद दबाव डालेगी कि शिक्षकों एवं कर्मचारियों के स्वास्थ्य सुरक्षा का पर्याप्त ध्यान रखा जाए।