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Cyber Crime : अमेरिका समेत अन्य देशों में प्राचीन सिक्के बेचने के नाम पर बुजुर्ग से 1.50 करोड़ की ठगी

Fri, 06 Feb 2026 12:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

चांदी का सिक्का बेचने के नाम पर साइबर ठगों ने बुजुर्ग को एक करोड़ 35 लाख रुपये चूना लगा दिया। शातिरों ने खुद को कॉइन सेलर बताकर अमेरिका, लंदन  समेत कई अन्य देशों में बेचने का झांसा दिया।
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साइबर क्राइम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के रहने वाले 65 वर्षीय बुजुर्ग से 1.50 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। शातिरों ने खुद को खरीदार और संग्रहकर्ता बताकर अमेरिका समेत अन्य देशों में चांदी व तांबे के प्राचीन सिक्कों को 60 करोड़ रुपये में बिकवाने का झांसा देकर पीड़ित को चपत लगा दी। ठगी की जानकारी के बाद पीड़ित आत्महत्या करने की सोचने लगा था। हालांकि, परिजनों के समझाने पर अनहोनी टल गई। साइबर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।

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पीड़ित को सितंबर 2025 में फेसबुक पर आरए सिंह नाम के एक कॉइन कलेक्टर्स ग्रुप के बारे में पता चला। इसके विवरण में मोबाइल नंबर साझा करते हुए जानकारी दी गई थी कि ग्रुप का संचालक सिक्का संग्रहकर्ता है। इच्छुक व्यक्ति संग्रह के सिक्कों के बारे में संपर्क कर सकते हैं। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि संपर्क साधने पर कई व्यक्तियों के फोन व संदेश प्राप्त होने लगे। उक्त लोगों ने खुद को सिक्कों का खरीदार और संग्रहकर्ता बताया।

उनके अनुरोध पर पीड़ित ने व्हाट्सएप पर पारिवारिक संग्रह के कुछ प्राचीन तांबे व चांदी के सिक्कों की तस्वीरें भेज दीं। खुद को मोहम्मद बिन नायफ बताने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि वह विदेशी खरीदारों के साथ काम करता है और उसकी पहुंच अमेरिका समेत अन्य देशों के बड़े खरीदारों तक है, जो दुर्लभ व प्राचीन सिक्के खरीदने में रुचि रखते हैं।

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जवाब में पीड़ित ने कहा कि वह केवल वैध तरीके से बैंक से ही लेनदेन करेंगे। ठग ने कहा कि उन्हें एक भारतीय बैंक खाता खोलना पड़ेगा। झांसे में आकर 22 सितंबर 2025 को बैंक ऑफ बड़ौदा में अपने दोस्त के साथ एक संयुक्त बैंक खाता खोला। ठग ने विश्वास दिलाया कि सिक्के विदेश में करीब 25 करोड़ में बिके हैं। आरोपी ने खाता खुलने के बाद पंजीकरण, प्रसंस्करण, लाइसेंस समेत अन्य शुल्क के नाम पर कई किस्तों में 1.84 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।

खुद को बेटी व भाई बताकर की ठगी

पीड़ित ने एफआईआर में बताया कि रुपये ट्रांसफर करने के बाद उनका परिचय सोफी, मिस्टर बोइस और मिस्टर रिक नामक व्यक्तियों से कराया गया। उन्होंने खुद को अमेरिकी वकील सलाहकार बताकर यूएस कॉइंस यूनियन प्रमाण पत्र व बैंक ऑफ अमेरिका की एक फर्जी रसीद भेजी। उन्होंने झांसे में लेकर कई बार में 1.14 करोड़ रुपये ऑनलाइन व 21 लाख रुपये नकद ले लिए। ठगों ने नकद लेनदेन से संबंधित व्हॉट्सएप चैट को डिलीट करवा दिया। पीड़ित ने बताया कि सोफी नाम की महिला उन्हें पिता मानती थी, जबकि बोइस अपना छोटा भाई कहता था।

 
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रुपयों को क्रिप्टो करेंसी में बदलने का झांसा

पीड़ित ने शिकायत में बताया कि ठगी होने के बाद आरोपियों ने संपर्क करना बंद कर दिया। इस बीच खुद का नाम इंदौर निवासी नीतीश बताते हुए एक युवक ने फोन किया और कहा कि ठगी की धनराशि को क्रिप्टो करेंसी में बदल दिया गया है। रुपये एक डिजिटल वॉलेट में हैं। उसने धनराशि वापस दिलाने के नाम पर लगभग 70 लाख रुपये हड़प लिए। पीड़ित के मुताबिक 100 से अधिक बार लेनदेन में करीब 1.35 से 1.50 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। साइबर थाना प्रभारी ओम नारायण गौतम ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

ठगी से ऐसे बचें

- ऑनलाइन सामान खरीदने, बेचने के लिए सिर्फ रजिस्टर्ड वेबसाइट पर ही भरोसा करें।
- बिना सोचे समझे जल्दबाजी न करें, अपने परिवार वालों, रिश्तेदारों या करीबियों से जानकारी लें।
- सोशल मीडिया पर दिखने वाले विज्ञापन की जांच के बाद ही लेनदेन करें।
- ठगी का शिकार होने पर तुरंत हेल्प लाइन नंबर 1930 या फिर cybercrime.in पर संपर्क करें।
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