परिषदीय विद्यालयों के लिए 68500 शिक्षक भर्ती परीक्षा की कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन के फैसले के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। परीक्षार्थियों का कहना है कि जिन कॉपियों में उत्तर बदले गए हैं तथा जिन कॉपियों के पेज फाड़े गए हैं, वह गड़बड़ी पुनर्मूल्यांकन में कैसे पकड़ में आएगी। परीक्षार्थियों ने पूरी परीक्षा दोबारा कराए जाने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि शिक्षक भर्ती का परिणाम घोषित होने के बाद एक परीक्षार्थी की कॉपी बदले जाने की पुष्टि होने और कई परीक्षार्थियों को स्कैन कॉपी में अधिक और रिजल्ट में कम अंक दिए जाने का मामला सामने आया था। गड़बड़ियों को लेकर शासन से पूरी परीक्षा प्रक्रिया की जांच के लिए गन्ना सचिव संजय भूस रेड्डी के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने जांच के बाद अब कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन का आदेश दिया है।
कॉपियों के दोबारा जांचे जाने के आदेश के बाद एक सवाल खड़ा हो गया है कि जिन परीक्षार्थियों की कॉपी में छेड़छाड़ की गई है, उनका क्या होगा। कई परीक्षार्थियों ने पूरे साक्ष्य के साथ आरोप लगाए हैं कि उनकी कॉपी में सही उत्तर गलत कर दिया गया। कई परीक्षार्थियों की शिकायत यह थी कि उनकी कॉपी के कुछ पेज फाड़कर बदल दिए गए हैं। परीक्षार्थियों का यह कहना है कि कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन किए जाने से कॉपी में हुई गड़बड़ी पकड़ में नहीं आएगी। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह दोबारा परीक्षा करवाए। परीक्षार्थियों का कहना है कि सचिव परीक्षा नियामक के पद से हटाए जाने के बाद डॉ. सुत्ता सिंह ने कई कॉपियों को नष्ट करवाने के साथ उन्हें जला दिया था, ऐसे में उनके साथ इंसाफ कैसे होगा।
परीक्षार्थियों का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद 160 कॉपियां दिखाई गईं, इसमें 145 कॉपियों में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। इसमें बड़ी संख्या में कॉपियों में सही उत्तर काटकर उसे गलत कर दिया गया है। कॉपियों में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद अब दोबारा परीक्षा के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जांच समिति के एक सदस्य डॉ. वेदपति मिश्र ने सचिव परीक्षा नियामक कार्यालय पर अपनी प्रारंभिक जांच में स्पष्ट कर दिया था कि भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है, दोषियों को सजा मिलेगी। अब समिति के अध्यक्ष की ओर से दोबारा मूल्यांकन के फैसले के बाद परीक्षार्थियों के आरोप की पुष्टि हुई है।