इलाहाबाद (ब्यूरो)। शिक्षाविद और अफसर भी अब सीसैट के विरोध में आ गए हैं। अनुशीलन शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास समिति की ओर से रविवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में आयोजित सेमिनार में सिविल सर्विसेज प्रांरभिक परीक्षा से सीसैट के पेपर को समाप्त करने की मांग की गई। वक्ताओं ने प्रारंभिक परीक्षा में गणित और बुद्धि परीक्षण समेत अन्य सभी विषयों को शामिल कर सिर्फ एक पेपर की परीक्षा कराने की मांग का प्रस्ताव भी पारित किया। सेमिनार की रिपोर्ट कार्मिक मंत्रालय को भेजी जाएगी।
सिविल सर्विसेज में सीसैट का शुरू से विरोध हो रहा है। प्रतियोगियों के विरोध को देखते हुए इस बार सीसैट को क्वालीफाइंग पेपर कर दिया गया है। इतना ही नहीं अंग्रेजी के प्रश्नों के अंक नहीं जोड़े जाने का भी निर्णय लिया गया है। इन बदलावों के साथ केंद्र सरकार की ओर से गठित कमेटी इस पेपर के औचित्य तथा इसमें संशोधन पर विचार कर रही है।
इसी क्रम में सीसैट के विरोध में अब शिक्षक और अफसर भी आ गए हैं। विश्वविद्यालय में आयोजित सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि रामनरेश त्रिपाठी, दिल्ली के मुख्यमंत्री के सचिव प्रवीण कुमार मिश्र, देवेंद्र सिंह, मनीष पांडेय, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जटाशंकर, प्रोफेसर एचके शर्मा, प्रोफेसर रामकिशोर शर्मा, डॉ.अंजनी मालवीय, प्रोफेसर.शबनम हमीद, प्रोफेसर मुश्ताक अली, कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर एचएस उपाध्याय आदि ने संबोधित किया। वक्ताओं का कहना था कि सीसैट का प्रशासनिक सेवा से कोई सरोकार नहीं है। उनका कहना था कि इस प्रश्नपत्र से एक वर्ग के अभ्यर्थी पहले चरण में बाहर हो जा रहे हैं।
इससे उनके साथ न्याय नहीं हो पा रहा। सिविल सेवा के साथ राज्य प्रशासनिक सेवा के लिए होने वाली भर्ती से भी सीसैट को समाप्त किया जाना चाहिए। वक्ताओं का कहना था कि प्रारंभिक परीक्षा में तीन घंटे का सिर्फ एक पेपर होना चाहिए। सामान्य अध्ययन के इस पेपर में गणित और रीजनिंग के भी प्रश्न शामिल किए जा सकते हैं। वक्ताओं ने यह मुद्दा भी उठाया कि पेपर हिन्दी में बनना चाहिए। उसका अंग्रेजी अनुवाद होना चाहिए और किसी तरह के विवाद पर हिन्दी के सवाल को ही सही माना जाना चाहिए। संयोजक प्रोफेसर एचएस उपाध्याय ने बताया कि एक-दो दिन में सेमिनार की रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट कार्मिक मंत्रालय को भेज दी जाएगी।