कुंभ के दौरान गंगा नदी में वाराणसी तक जल परिवहन सेवा की कवायद एक बार फिर तेज हो गई है। भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण नदी में मार्ग तथा जेट्टी तैयार कर चुका है। मोटरबोट का संचालन निजी हाथों में होगा। हालांकि, संगम तक मोटरबोट नहीं आ पाएंगे। छतनाग से ही संचालन किया जाएगा। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रवीर पांडेय ने बताया कि नाव या मोटरबोट चलाने के लिए गंगा नदी में एक मीटर गहराई जरूरी है। छतनाग से वाराणसी के बीच यह गहराई सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा छतनाग, सिरसा, सीतामढ़ी, विंध्याचल और चुनार में जेट्टी स्थापित की गई है। इनकी मदद से नावों तथा मोटरबोट का संचालन किया जा सकता है।
कुंभ के बाद भी मोटरबोट सेवा की कवायद
कुंभ के बाद भी गंगा नदी में वाराणसी तथा यमुना में सुजावन देव तक मोटरबोट सेवा जारी रखने की तैयारी है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने बताया कि जलमार्ग तैयार हो चुका है। जेट्टी बने हुए हैं। आगे भी यह सेवा जारी रखने की योजना है। उन्हाेंने बताया कि गंगा सागर और बिहार में प्रकाश पर्व के अलावा भी जल परिवहन की सुविधा जारी है।
वाराणसी से प्रयागराज के बीच भारी जलयान को चलाने की कवायद तेज हो गई है। प्रारंभिक सर्वे के सकारात्मक रिजल्ट आए हैं। जलमार्ग तथा मल्टी मोड टर्मिनल के निर्माण को लेकर अन्य पहलुओं पर भी सर्वे कराया जा रहा है। लवायन कला में गंगा तट पर भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण की जमीन है। वहीं पर टर्मिनल बनाने की तैयारी है।
उपाध्यक्ष प्रवीर पांडेय ने प्राधिकरण की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि सड़क और रेल की तुलना में जल परिवहन काफी सस्ता है। पर्यावरण की दृष्टि से भी यह सबसे सुरक्षित है। इसके बावजूद 2014 से पहले तक देश में पांच राष्ट्रीय जल मार्ग ही थे, लेकिन इसके बाद इनके निर्माण में तेजी आई। अब इनकी संख्या 111 हो गई है। हल्दिया से प्रयागराज के बीच जल परिवहन की योजना है। इसकी कुल दूरी 1620 किमी है। इसका नाम राष्ट्रीय जलमार्ग-एक है।
उन्होंने बताया कि इसका पहला टर्मिनल वाराणसी में शुरू हो चुका है। नवंबर में प्रधानमंत्री ने इसका उद्घाटन किया था। इनके अलावा झारखंड, हल्दिया, गाजीपुर, बिहार में टर्मिनल बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि वाराणसी से प्रयागराज के बीच गंगा पर कई जगहों पर पीपा के पुल हैं। इन्हें हटाने में दो दिन लग जाते हैं। इतने समय तक जलयान को खड़ा नहीं किया जा सकता। प्रयागराज तक जलमार्ग के निर्माण में यह बड़ी बाधा है लेकिन अब यह समस्या भी दूर हो गई है। चार देश के विशेषज्ञों की टीम ने सर्वे किया है। नई तकनीक की मदद से जहाज आने पर पीपे के पुल को एक से दो घंटे में ही हटाया जा सकता है। इसके अलावा सर्वे में भी यह बताया गया है कि वाराणसी से प्रयागराज के बीच भी माल ढुलाई के लिए जलयान चलाए जा सकते हैं। प्रवीर ने बताया कि सकारात्मक रिपोर्ट आने के बाद अन्य बिंदुओं पर सर्वे कराया जा रहा है। लवायन कला में विभाग की साढे़ आठ हेक्टेयर जमीन है। इसे प्रशिक्षण के लिए लिया गया था लेकिन वह योजना बिहार चली गई। उसी जगह पर मल्टी मोड टर्मिनल बनाए जाने की संभावना है। वहां ट्रक आदि ले जाने की भी सुविधा है। सर्वे आदि की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लवायन कला में भी टर्मिनल बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि यमुना नदी पर दिल्ली तक जलमार्ग बनाए जाने की योजना भी है। सर्वे शुरू है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की तैयारी की जाएगी।