बारिश सबके लिए एक जैसी नहीं रही। किसी के लिए खुशहाली लाई तो किसी के लिए दुखों का पहाड़ा। ऐसा ही हाल मेजा के नहवाई के किसानों का है। बारिश से किसानों की करीब 154 एकड़ धान की फसल डूबी है।
यह पहला मौका नहीं है जब आसमानी आफत उनपर बरसी हो, पिछले वर्ष भी खरीफ और रबी की फसलें बारिश की भेंट चढ़ चुकी हैं। पिछले साल भी किसानों के अरमानों पर पानी फिरा था, इस बार भी वही लग रहा है।
किसानों ने बताया कि पानी निकासी की व्यवस्था बाधित होने से अमिलिया कला के नहवाई मौजे की 154 हेक्टेयर धान की फसल पखवाड़े भर से डूबी है। कई बार शिकायत के बाद भी पानी निकासी की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
मेजा में हाईवे के किनारे बसे अमिलिया कला के नहवाई मौजे में धान की अच्छी खेती होती थी लेकिन दो वर्ष से टुड़िहार गांव के सामने पानी निकासी की व्यवस्था बाधित है। इस वजह से दो वर्ष से बारिश में फसल डूब जा रही है।
पिछले वर्ष भी धान की फसल डूब गई थी। उस समय भी महीनों तक पानी नहीं निकला था। जिससे धान की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। किसान सुभाष भारतीया ने बताया कि धान की फसल नष्ट होने के बाद गेहूं की भी बुआई नहीं की जा सकी थी। खेतों में पानी भरा था।
इस बार लगा कि धान की खेती अच्छी होगी लेकिन बारिश के पानी से फिर फसल डूब गई। 15 दिनों से फसल डूबी है। किसान शिवदेवी ने बताया कि शिकायत के बाद भी पानी निकासी की व्यवस्था नहीं की जा सकी। मेजा के उप जिलाधिकारी अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि पानी निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त कराया जाएगा। संवाद
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