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पानी टंकी फटी, दो बच्चों की मौत

Tue, 16 Dec 2014 01:17 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला इलाहाबाद
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बहरिया। गंगापार के बहरिया इलाके में सोमवार दोपहर ईंट-भट्ठे में बने पानी टंकी की दीवार फटने से बड़ा हादसा हो गया। दो बच्चों की इस दुर्घटना में मौत हो गई, जबकि दो बालक गंभीर रूप से घायल हैं। इस घटना से कोहराम मच गया। मजदूर परिवारों की महिलाएं रोने-चीखने लगीं। मौके पर तहसीलदार के साथ पुलिस पहुंची। भारी विरोध के बीच पुलिस ने किसी तरह शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस भेजा। जांच के बाद पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि यह हादसा भट्ठा मालिक की लापरवाही से हुआ है। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बहरिया में जुगनीडीह के शाहजी का पूरा गांव में नसीर सिद्दकी ने ईंट-भट्ठा बनवाया है। पक्की चिमनी के निर्माण के साथ कच्ची ईंट की पथाई भी शुरू करा दी गई है। भट्ठे के उत्तर दिशा में आठ दिन पहले पानी भरने के लिए पक्की टंकी बनाई गई थी। सोमवार को हौज में पानी भरा गया। दोपहर करीब डेढ़ बजे भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चे हौज में लगे नल के नीचे नहाने लगे। उन्हें नहाते देख शाहजी का पूरा गांव की रोशनी (12) पुत्री मकबूल भी पहुंच गई। चारों बच्चे नहा रहे थे तभी टंकी की चारो दीवार भरभरा गई। बच्चे मलबे के नीचे दब गए। चीख-पुकार मची तो मजदूर और उनके परिवार के लोग पहुंच गए। गांव वाले भी जुट गए। मलबे के नीचे दबे बच्चों को बाहर निकाला गया। दो बच्चों प्रदीप और लवलेश की मौके पर ही मौत हो गई थी। उनके शरीर क्षतविक्षत हो गए थे। गंभीर रूप से घायल आरती और रोशनी को फौरन अस्पताल ले जाया गया।

हादसे का शिकार हुए दोनों बच्चे प्रदीप और लवलेश बांदा मे बबेरू इलाके के रहने वाले थे। प्रदीप (5) बबेरू में कोन गांव निवासी कामता प्रसाद उर्फ नाथू तथा लवलेश हरदौली गांव के राजू का बेटा था। घायल आरती (8) भी हरदौली गांव निवासी चुन्नीलाल की पुत्री है। घटनास्थल पर खून बिखरा था। वहां कोहराम मच गया। कई गांव के लोग जुट गए। वहां से गुजर रहे जिला पंचायत सदस्य सुरेंद्र चौधरी ने बच्चों की मौत पर हंगामा कर दिया। उन्होंने डीएम और एसएसपी को फोन कर फौरन राहत और मदद की मांग की। चौकी इंचार्ज सिकंदरा पुलिसकर्मियों के साथ वहां पहुंच गए। वह बच्चों के शव कब्जे में लेने लगे तो मगर भारी विरोध के चलते पुलिस को इस मंशा में कामयाबी नहीं मिली। दुखी परिजन और दूसरे मजदूर अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग पर डटे रहे। कार्रवाई और मदद के आश्वासन पर शाम करीब चार बजे पुलिस किसी तरह दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज सकी। तहसीलदार फूलपुर आशुतोष कुमार सिंह भी आ गए। उन्होंने भट्ठे की जांच की। तहसीलदार ने बताया कि भट्ठा मालिक की लापरवाही से मजदूरों के बच्चाें की जान गई। टंकी की दीवारें ठीक से तैयार नहीं हो सकी थी लेकिन उसमें पानी भर दिया गया।
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‘ईंट-भट्ठा बस्ती से दो सौ मीटर दूर होना चाहिए मगर उसे बस्ती के करीब बनाया गया है। आसपास आम और फलदार वृक्षों के बाग हैं। भट्ठे का संचालन मानक और नियम के विपरीत है। मजदूरों के बच्चों की मौत के पीछे मालिक की लापरवाही है। ताजे बनी टंकी पानी भरने से फठ गई।’
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0आशुतोष कुमार सिंह, तहसीलदार फूलपुर
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