इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बवाल के केंद्र में एक प्रोफेसर हैं। हमेशा विवादों में रहे तथा वित्तीय अनियमितता के आरोप में घिरे प्रोफेसर के खिलाफ छात्र लंबे समय से आंदोलनरत हैं। पिछले साल भी उनके खिलाफ आंदोलन हुआ था। इसके बावजूद उन्हें प्रवेश कराने की जिम्मेदारी दी गई। उनके प्रति कुलपति का यह लगाव भी हैरान करने वाला है। इससे छात्राें का गुस्सा बढ़ गया है।
यह प्रोफेसर पहले भी तीन बार प्रवेश परीक्षा की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। मगर पहली बार की प्रवेश प्र्रक्रिया में हुए खर्च का भुगतान अभी तक नहीं हो सका है। तत्कालीन वित्त अधिकारी ने प्रवेश परीक्षा कराने में हुए खर्च पर आपत्ति लगाई थी। इस वजह से अभी तक भुगतान नहीं हो सका है। इसके बावजूद प्रोफेसर जगदम्बा सिंह के प्रवेश प्रकोष्ठ से इस्तीफा देने के बाद पिछले साल उन्हें दाखिले की जिम्मेदारी दे दी गई।
गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल ज्यादातर पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी सामने आई थी। शोध प्रवेश परीक्षा तो दोबारा करानी पड़ी। प्रोफेसर साहब के साथ इतने विवाद जुड़े होने तथा आरोपों के बावजूद इस बार फिर उन्हें यह जिम्मेदारी दे दी गई। इससे छात्रों में जबरदस्त नाराजगी है और वे पूरी प्रवेश समिति भंग करने की मांग कर रहे हैं। छात्रों के आंदोलन को अध्यापक संघ तथा कर्मचारियों का भी समर्थन प्राप्त है। इसके बावजूद कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू उन्हें पद से हटाने के पक्ष में नहीं हैं।
लाइब्रेरी से किताबें निर्गत करने की मांग को लेकर छात्र-छात्रा कई वर्षों से आंदोलनरत हैं। उन्होंने कई बार आमरण अनशन भी किया। छात्रों की हालत बिगड़ने पर तीन साल पहले ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने लाइब्रेरी से सभी विद्यार्थियों को पुस्तक निर्गत करने का लिखित आश्वासन दिया था। इसकी तारीख भी तय कर दी गई। इस तरह के लिखित आश्वासन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कई बार दिए गए लेकिन कर्मचारियों की कमी की बात कहकर हमेशा इस मुद्दे को टाला जा रहा है। इससे छात्रों में गुस्सा बढ़ता गया और बृहस्पतिवार को विस्फोटक रूप धारण कर लिया।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार का पद तीन साल से भी अधिक समय से खाली है। कार्यवाहकों के भरोसे से ही विश्वविद्यालय चल रहा है। यही स्थिति वित्त अधिकारी (एफओ) के पद को लेकर भी है। पिछले साल दोनों पदों के लिए चयन प्रक्रिया पूरी की गई लेकिन चयनित अफसर विश्वविद्यालय की शर्त पर ज्वाइन करने के लिए तैयार नहीं हुए हैं। ऐसे में अब इन दोनों पदों के लिए फिर से प्रक्रिया अपनानी होगी।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ नाराजगी को लेकर तीन साल पहले जैसे हालात फिर बन गए हैं। फैसलों में मनमानी, संवादहीनता का आरोप लगाते हुए छात्र आंदोलनरत हैं तो अध्यापकों का बड़ा वर्ग भी कुलपति के खिलाफ लामबंद हैं। इतना ही नहीं तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने भी आंदोलन के लिए संयुक्त परिषद का गठन किया है।
तीन साल पहले कुलपति रहे प्रोफेसर एके सिंह के खिलाफ भी ऐसा ही माहौल बना था, जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। संवादहीनता तथा मनमाने फैसलों को लेकर आरोपों की जांच के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई थी। आंदोलन के क्रम में छात्रों ने कुलपति को उनके आवास पर बंधक बना लिया था। कई सांसद भी इसमें शामिल हुए थे। इसके अलावा कर्मचारियों ने भी आंदोलन छेड़ रखा था। इससे बने दबाव के बाद प्रोफेसर एके सिंह ने इस्तीफा दे दिया था।
कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू के खिलाफ भी छात्र लगातार आंदोलनरत हैं। प्रोफेसर हांगलू के ज्यादातर फैसलों पर तो विवाद है। उन पर यह भी आरोप है कि किसी बड़े आंदोलन की घोषणा होती है वह शहर से बाहर चले जाते हैं। बुधवार को तो छात्रों ने उन्हें लापता घोषित करते हुए पोस्टर तक जारी कर दिया। छात्रों के इन आंदोलनों में सत्ता दल के सांसद भी कई बार शामिल हुए। नेताओं तथा अध्यापकों की शिकायत पर राष्ट्रपति की ओर से जांच भी कराई जा रही है। ऐसे में पहले से घिरे कुलपति की उग्र आंदोलन तथा एक छात्र के आत्मदाह करने की घटना से परेशानी बढ़ गई है।