जेल में चुनावी खेल की भनक लगने पर मंगलवार भोर में पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम ने नैनी सेंट्रल जेल में छापा मारकर तलाशी ली। शिकायत यह भी थी कि जेल में लगा जैमर बंद है जिसकी वजह से तमाम कैदी कर्मचारियों से मिलीभगत के जरिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। करवरिया बंधुओं के बैरक का दरवाजा भीतर से बंद होने पर डीएम और एसएसपी ने जेल अधीक्षक से नाराजगी जाहिर की और कार्रवाई के लिए गृह सचिव को पत्र भेजा है।
सेंट्रल जैल नैनी में चोरी-छिपे मोबाइल फोन इस्तेमाल होने की लगातार शिकायतों के चलते कुछ दिन पहले जैमर लगाए गए हैं। मगर सोमवार रात जैमर बंद था और जेल से कई मोबाइल फोन पर बाहर लोगों से बात की जा रही थी। यह जानकारी डीएम संजय कुमार और एसएसपी शलभ माथुर को मिली तो उन्होंने मंगलवार भोर में करीब पौने पांच बजे सभी एडीएम, एसडीएम, एसपी यमुनापार, कई सीओ और 14 थानों की पुलिस-पीएसी फोर्स के साथ जेल में छापा मारा। गेट खुलते ही सभी अधिकारी सबसे पहले जेल में बंद करवरिया बंधुओं यानी पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया, पूर्व एमएलसी सूरजभान करवरिया और पूर्व विधायक उदयभान करवरिया की बैरक पर पहुंचे। अफसर यह देखकर स्तब्ध थे कि बैरक का दरवाजा बाहर की बजाय अंदर से बंद था। तकरीबन 15 मिनट बाद दरवाजा खुला। पुलिस-पीएसी के साथ डीएम और एसएसपी ने बैरक की तलाशी ली तो लाइटर, चार्जर और म्यूजिक डिवाइस मिला, जिन्हें जब्त कर लिया गया।
बैरकों के भीतर मिले चिलम, चार्जर, लाइटर
बैरक अंदर से बंद होने पर डीएम ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक केदारनाथ को फटकार लगाई। इसके बाद जेल की पांच सर्किल की सभी 24 बैरक को चेक किया गया। तलाशी में एक चिलम, 12 लाइटर, सिगरेट के पैकेट भी मिले। हालांकि एक भी मोबाइल फोन नहीं मिलने से छापेमारी में शामिल अफसर हैरान थे क्योंकि एसटीएफ और क्राइम ब्रांच को सर्विलांस से पता चला था कि जेल में कई मोबाइल फोन पर बात हो रही है। डीएम ने जैमर लगाने वाली कंपनी और जेल के अफसरों पर कार्रवाई के लिए गृहसचिव उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजा है।