झूंसी में करोड़ों रुपये की रेलवे जमीन घोटाले को दबाने की कोशिश पहले ही शुरू हो गई थी। जांच कराने के बाद कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि भूमाफिया के साथ ही संबंधित अफसरों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई जाए। हालांकि इसके बाद भी महज दो भूमाफिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। बाद में क्राइम ब्रांच ने विवेचना के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर तत्कालीन एसडीएम समेत अन्य अफसरों को आरोपी बनाया। जब क्राइम ब्रांच की जांच तेज हुई। कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने के साथ ही अफसरों को पूछताछ के लिए बुलाने की कवायद शुरू हुई तो सत्ताधारी नेताओं के साथ मिलकर मामले की जांच सीबीसीआईडी को ट्रांसफर करा दी गई।
झूंसी में राजस्व विभाग के अभिलेखों में हेराफेरी कर रेलवे की करोड़ों रुपये की जमीन का मालिकाना हक बदल देने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था। सूत्रों की मानें तो शिकायत मिलने के बाद कमिश्नर ने जांच कराई। साथ ही जांच रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट निर्देश दिया था कि मामले में भूमाफिया के साथ ही संबंधित अफसरों को आरोपी बनाते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाए। हालांकि इस पर ध्यान न देते हुए महज दो भूमाफिया कुतुबुद्दीन और सलाउद्दीन के खिलाफ एफआईआर लिखाई गई। क्राइम ब्रांच ने विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर तत्कालीन एसडीएम समेत अन्य अफसरों के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई तो हड़कंप मच गया। हाल ही 13 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। कुछ बड़े अफसरों को भी पूछताछ के लिए नोटिस दिया गया। कुछ को और उठाने की तैयारी क्राइम ब्रांच कर रही थी। इसी बीच अचानक जांच सीबीसीआईडी को ट्रांसफर करने की कोशिश शुरू कर दी गई। आखिरकार मामला सीबीसीआईडी को भेज दिया गया। अब माना जा रहा है कि नई जांच एजेंसी आएगी तो नए सिरे से पूरी प्रक्रिया की जाएगी और मामला लटक जाएगा। तबतक आरोपी कुछ और रास्ता निकाल लेंगे।
सूत्रों के मुताबिक भूमाफिया और भ्रष्ट अफसरों के गठजोड़ ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर हड़पी गई जमीन को बेचने की भी तैयारी कर ली थी। सूत्रों की मानें तो विवेचना के दौरान यह बात भी सामने आई थी कि इस जमीन को बेचने की भी योजना बनाई गई थी। इसके लिए कई बार बैठकेें व बातचीत भी हुई थी। हालांकि मामला एनओसी को लेकर फंस गया। रेलवे की ओर से एनओसी न दिए जाने के कारण ही भूमाफिया जमीन बेचने के अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके।