रसूलाबाद घाट पर इकलौते बेटे डॉ. शाश्वत की चिता को मुखाग्नि देते समय डॉ. संजय पांडेय फफककर रो पड़े। लोगों ने उन्हें किसी तरह संभाला। वह कभी शून्य में निहारते और कभी भैया...भैया...कहां हो... कहकर बिलख पड़ते। एक बेबस पिता का यह दु:ख लोगों का कलेजा चीर रहा था। हर किसी की आंखें नम थीं। रिश्तेदारों के साथ शहर भर के चिकित्सक घाट पर मौजूद थे।
रविवार भोर में करीब 3.20 बजे थे। डॉ. संजय पांडेय के चर्च लेन स्थित आवास पर जुटे लोगों में कुछ के मोबाइल फोन की घंटी अचानक बजने लगी। सन्नाटा टूटा तो लोग कुर्सियों से उठकर बाहर निकले। दस मिनट के भीतर दरवाजे पर एंबुलेंस आकर रुकी। लोग उस ओर लपके तो डॉ. शालिनी पांडेय और बेटी श्रेया का रोना लोगों का कलेजा चीरने लगा। उन्हें किसी तरह संभालते हुए भीतर ले जाया गया। सभी की आंखें नम थीं। दस मिनट बाद ही एक और एंबुलेंस वहां पहुंची। डॉ. शाश्वत के शव के साथ उनके सहपाठी थे। वे आंसू पोंछते हुए एक के बाद एक नीचे उतरे। चिरनिद्रा में लीन शाश्वत की एक झलक पाने की होड़ मच गई। लोगों के रोने बिलखने से सन्नाटा टूटा। लोग शाश्वत का शव उतार कर घर के भीतर ले गए तो गमगीन डॉ. संजय पांडेय अपने पर काबू नहीं रख सके और दहाड़ मारकर रोने लगे। दोनों हाथों को फैलाकर, बोले मेरा तो सबकुछ चला गया।
इससे पहले दिल्ली से एयर इंडिया की फ्लाइट से डॉ. संजय का शव लखनऊ लाया गया। डॉ. संजय के घरेलू मित्र पल्लव पांडेय, डॉ. शालिनी पांडेय, श्रेया पांडेय, शाश्वत के सहपाठी मित्र साथ थे। वहां से एक एंबुलेंस में बेटी श्रेया के साथ डॉ. शालिनी और डॉक्टर आदि थे। दूसरी एंबुलेंस में डॉ.शाश्वत के मित्र शव लेकर इलाहाबाद के लिए निकले। भोर में करीब 3.20 बजे शाश्वत के शव को लेकर आ रही एंबुलेंस को कमिश्नर आवास के पास रोककर डॉ. शालिनी को पहले घर भेजा गया। पति-पत्नी घर में आमने-सामने हुए तो दोनों के विलाप देखने वाले भी रो पड़े। इसके बाद शाश्वत का शव घर पहुंचा तो सुबह आठ बजे से लेकर शव यात्रा निकलने तक घर में रोना मचा रहा।
घाट पर डॉ. ओपी बजाज, इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आलोक मिश्रा, सचिव त्रिभुवन सिंह, इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के डॉ. सुशील सिन्हा, अवनीश सक्सेना, डॉ. अशोक अग्रवाल, डॉ. मुकुल पांडेय, डॉ. सर्वजीत सिंह कपूर, निकुंज अग्रवाल के साथ बड़ी संख्या में चिकित्सक मौजूद रहे।