रास्ते के विवाद में गई महिला की जान
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कटरा इलाके में छह रोज पहले कारोबारियों अमित केसरवानी तथा सचिन जायसवाल की हत्या की वारदात में कर्नलगंज पुलिस के ढुलमुल रवैये से पीड़ित परिजनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उन्हें प्रलोभन दिया जा रहा है कि पैसे लेकर केस वापस ले लो। अमित की पत्नी ने बुधवार को चेतावनी दी कि पुलिस ने हत्या में शामिल बाकी दोषियों की गिरफ्तारी नहीं की तो वह आत्मदाह के लिए मजबूर हो जाएंगी।
24 नवंबर को कटरा में रहने वाले कपड़ा दुकानदार अमित केसरवानी और स्टेशनरी शॉप मालिक सचिन जायसवाल अपने मित्र कृष्णा केसरवानी के साथ शराब पीने के बाद सफारी गाड़ी में घूमने निकले थे। आधी रात बाद कृष्णा ने परिजनों को बताया कि अमित और सचिन की दुर्घटना में मौत हो गई है। हालांकि परिजनों ने इसे कत्ल करार दिया। पुलिस ने मुकदमा लिखकर कृष्णा और उसके दोस्त दिव्यांशू चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया। वे दोनों इसे हादसा ही बताते रहे। दिव्यांशू ने कहा कि उसे तो रात में घटना के बाद कृष्णा ने फोनकर बुलाया था। मगर परिस्थितियां इसे कत्ल बता रही हैं इसलिए पुलिस ने उन दोनों को जेल भेज दिया।
तब से चार रोज गुजर गए पुलिस अफसर बयान में इसे हादसा ही बताते हैं। अमित की पत्नी अंशू ने बुधवार दोपहर पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा कि राजनैतिक दबाव के चलते पुलिस इस दोहरे कत्ल को हादसा करार देेने पर तुली है। इस बीच कुछ लोगों ने पैसे लेकर हत्या के मुकदमे को वापस लेने का भी प्रलोभन और दबाव दिया। अंशू ने अफसरों से कहा है पति के कत्ल से वह और उनके दो बच्चे मुसीबत में हैं। पति की हत्या में शामिल बाकी लोगों का भी पता लगाकर गिरफ्तारी की जाए ताकि परिवार को इंसाफ मिल सके। उधर, दूसरे मृतक सचिन के भाई सुमित जायसवाल ने भी आरोप लगाया कि पुलिस बाकी कातिलों को नहीं पकड़ रही है जिससे परिजनों को खतरा बना है। पुलिस ने बहुत दबाव और फरियाद पर केस लिखकर दो लोगों को जेल भेजा लेकिन इसे हादसा कहकर लीपापोती हो रही है।