कीडगंज में बृहस्पतिवार की शाम भार्गव कोठी में विहिप के वनवासी छात्रावास के पिछले हिस्से की दीवार समेत छत गिरने से दो मासूम मलबे में दब गए। छात्रावास के एक कमरे की भी छत लटक गई। छात्रावास में मौजूद बच्चों ने तो बाहर भागकर जान बचाई, लेकिन दूसरे कमरे में मलबे के बीच दबकर दोनों बच्चों की मौत हो गई।
जर्जर हो चुकी भार्गव कोठी में संचालित विहिप के वनवासी छात्रावास के पिछले हिस्से की मिट्टी की दीवार शाम 6:40 बजे छत समेत भरभरा कर गिर गई। जिस कमरे की दीवार गिरी उसमें रिक्शा चालक संजय गौड़ का परिवार रहता था। उसकी पत्नी सुमन सड़क पर ठेला लगाती है। सुमन अपने तीन बच्चों के साथ उसी कमरे में थी। हादसे से महज पांच मिनट पहले वह अपनी एक पुत्री कामिनी खेलने के लिए बाहर जाने की जिद करने लगी। सुमन उसे बहलाने के लिए बाहर निकली ही थी कि तबतक तेज आवाज के साथ दीवार गिर गई और पूरी छत ढह गई। इससे कमरे में मौजूद उसके दो बच्चों में 15 माह का पुत्र सोना और छह वर्षीया पुत्री अनुष्का उर्फ शिवानी मलबे में दब गए।
सुमन की चीख-पुकार सुन विहिप के प्रखंड अध्यक्ष प्रेमचंद्र गुप्ता के अलावा वनवासी छात्रावास के बच्चे भी पहुंच गए। डायल-100 को हादसे की सूचना दी गई। कुछ देर में कीडगंज पुलिस भी आ गई। कच्ची मिट्टी और खपरैल के छाजन का मलबा हटाया जाने लगा। इसी दौरान बारिश होने लगी। करीब घंटे भर बाद मलबे में दबे बच्चों को बाहर निकाला जा सका। शिवानी और सोना को एंबुलेंस से स्वरूप रानी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
एसएसपी नितिन तिवारी के अलावा महापौर अभिलाषा गुप्ता ने घटना स्थल का जायजा लिया और परिजनों को सांत्वना दी। जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने आपदा राहत कोष से दोनों बच्चों के आश्रित परिवार को 4.50-4.50 लाख रुपये देने की घोषणा की है।