पीपल गांव के शाह गांव के रहने वाले गुलाब चंद्र कुशवाहा के तीन बेटों में बीच वाले मनोज और छोटे गोपाल का परिवार साथ में रहता था। गुलाब चंद्र ज्यादातर समय खेत के ट्यूबवेल पर बिताते थे। सोमवार को गुलाब और उनका छोटा बेटा गोपाल खेत में थे। गोपाल की पत्नी साधना घर पर थी। उसके बगल के कमरे में हैवानियत का खेल खेला गया और उसे भनक तक नहीं लगी।
गोपाल की पत्नी साधना ने बताया कि दोपहर में साढ़े बारह बजे तक सब बच्चों को देखा गया था। सभी खेल कूद रहे थे। मनोज और उसकी पत्नी सुनीता भी घर पर सामान्य थे। उनकी हरकतों ऐसा कुछ नहीं लग रहा था कि मनोज इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में है। इसके बाद से मनोज का परिवार अपने कमरे में चला गया। दोपहर बाद अचानक मनोज के कमरे से टीवी की तेज आवाज आने लगी। कुछ देर साधना ने सुना फिर उसने दरवाजा भी खटखटाया लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो वह अपने कमरे में चली गई। उसे भनक तक नहीं लगी कि पास के कमरे में दिल दहला देने वाली हत्याएं की जा रही हैं। जब गुलाब खेत से वापस लौटे तो साधना ने बताया कि मनोज भइया का दरवाजा नहीं खुल रहा था। टीवी बहुत तेज चल रही है। गुलाब को भी आशंका हुई तो उन्होंने अपने मित्र ग्राम प्रधान पीपल गांव को फोन कर बुला लिया। जब काफी प्रयास के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो पुलिस को सूचना दी गई।