प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड राजेंद्र उपाघ्याय (45 ) की हत्या कर बुधवार देर रात शव बहरिया के जंगल में फेंक दिया गया। शव की पहचान न होने के कारण पुलिस ने पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। बाद में परिजनों ने शव को पहचान लिया और एजेंसी मालिक सहित दो लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया है।
बमरौली के बेगम बाजार निवासी राजेंद्र कुमार उपाध्याय अशोक नगर स्थित बाबा डाट कॉम एजेंसी में प्राइवेट सिक्योरिटी पर थे। बाद में उनको आलोक मिश्रा ने अपनी पर्सनल सिक्योरिटी में लगा लिया था। तीन जून को वह लखनऊ ले गए। 16 जून को राजेंद्र ने ुपरिजनों को फोन किया कि आलोक मिश्रा परेशान कर रहे हैं। यह जानकारी परिवार वालों ने थाना प्रभारी को दी। उसी समय थाना प्रभारी की बात कराई तो राजेंद्र ने कहा कि अब कोई परेशानी नहीं है। मंगलवार को आलोक ने मृतक के बेटे आकाश के मोबाइल पर राजेंद्र के मोबाइल से फोन और मैजेस किया था कि राजेंद्र की अचनाक तबियत खराब होने के कारण मौत हो गई है। अपने पिता के शव को लेने के लिए फाफामऊ आ जाओ।
आकाश और परिवार वाले कई घंटे तक फाफामऊ में आलोक मिश्रा का इंतजार करते रहे। उन्हें आलोक मिश्रा नहीं मिले और न ही उनसे फोन पर वार्ता पाई। अगले दिन गुरुवार को थाना धूमनगंज पुलिस ने आकाश को बताया कि बहरिया के जंगल से एक शव अज्ञात के नाम से पोस्टमार्टम के लिए आया था। थाना प्रभारी की सुचना पर बेटा आकाश, पत्नी रमा देवी और परिजनों ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर शव देखकर पहचान लिया कि यह लाश तो राजेंद्र उपाध्याय की है। शव की जेब में सिर्फ एक पर्ची मिली थी, जिस पर आकाश का मोबाइल नंबर था लेकिन उसमें मोबाइल के नौ नंबर थे। एक अंक गायब था। जिसके कारण बहरिया थाने की पुलिस को शव का पंचनामा अज्ञात में ही दर्ज करना पड़ा।
सिक्योरिटी गार्ड राजेंद्र उपाध्याय अपने साथ आलोक की सुरक्षा के लिए दो नाली लाइसेंसी बंदूक साथ ले गए थे। शव के पास से उनकी बंदूक नहीं मिली है और न ही लाइसेंस। परिजनों का कहना है कि लाइसेंस के अलावा परिचय पत्र तथा अन्य प्रपत्र भी साथ रहते थे। वह भी राजेंद्र के कपड़ों से नहीं मिले हैं। मृतक की पत्नी रमा देवी की ओर से थाना धूमनगंज में आलोक मिश्रा और विष्णु पांडे के खिलाफ हत्या और हत्या करके शव और शस्त्र दोनों को छिपाने का मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। दूसरी ओर नामजद दूसरे आरोपी विष्णु पा़ंडेय का कहना है कि हत्या से कोई मतलब नहीं हैं। वह तो सिर्फ आलोक मिश्र के मुकदमों की पैरवी करते हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राजेंद की मौत को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। सिर और हाथ पैर पर चोट के निशान हैं। हाथ पैर को किसी जानवर के खाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। पेट और चेहरे पर चमड़ी नहीं थी। मौत की वजह जहरीला पदार्थ खिलाना या फिर मारपीट सकती है। इसीलिए मृतक का विसरा सुरक्षित रख लिया है। जिसे परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा।