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हाईकोर्ट में बम प्लांट करने वाला गिरफ्तार 

Sat, 29 Oct 2016 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था को धता बताकर 55 नंबर कोर्ट रूम में बम रखने वाला शातिर शुक्रवार को पुलिस के शिकंजे में आ गया। पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों के अंदर इस सनसनीखेज घटना के आरोपी संतोष कुमार अग्रहरि (38) को गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा करने का दावा किया। आरोपी हाईकोर्ट का पूर्व अस्थायी कर्मचारी रहा है। उसी ने गुरुवार रात कोर्ट रूम में टिफिन में बम रखे होने की सूचना दी थी। कैंट पुलिस ने पूछताछ के बाद उसे पकड़ा तो वह कुछ देर तक गुमराह करता रहा। पुलिस ने जब उसे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज दिखाई तो वह सन्न रह गया। उसने हाईकोर्ट में बम रखकर सनसनी फैलाने की बात कुबूल कर ली। बम रखने के पीछे उसकी साजिश और मंशा क्या थी। वह बम कहां से और कैसे लाया। पूरी कहानी पुलिस अफसरों के सामने सिलसिलेवार बताई। 
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एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि  संतोष कुमार अग्रहरि मूलरूप से अमेठी जनपद के वार्ड नंबर आठ मुसाफिर खाना इलाके का निवासी है। वह यहां धूमनगंज के राजरूपपुर में रहता है। वह लगभग 14 साल से वह हाईकोर्ट आता-जाता है। कुछ साल पहले तक हाईकोर्ट का अस्थायी कर्मचारी रहा। हाईकोर्ट की नौकरी छूट जाने के बाद भी उसका हाईकोर्ट में आनाजाना बना रहा। उसे हाईकोर्ट की नौकरी रास आ गई थी। वह इसके अलावा कोई दूसरी नौक री नहीं करना चाहता था। इन्हीं बातों को जेहन में रख उसने यह साजिश रची। फिलहाल पुलिस ने आरोपी संतोष के खिलाफ कैंट थाने में विस्फोटक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। 

 पूछताछ में संतोष ने बताया कि हाईकोर्ट की नौकरी उसे पसंद थी। नौकरी छूटने के बाद उसने रेलवे क ी ठेकेदारी समेत कई कारोबार कर हाथ आजमाया लेकिन कहीं सफलता नहीं मिली। इस कारण वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। कई कर्मचारियों से उसकी अच्छी जान-पहचान भी थी। जिसके चलते वह अक्सर हाईकोर्ट पहुंच जाता और छोटे-मोटे काम कर दो-तीन सौ रुपये कमा लेता था। उसने सोचा कि हाईकोर्ट में बम रखा दिया जाए। इसके बाद इसकी सूचना कर्मचारी के जरिए हाईकोर्ट के जज तक पहुंचेगी। जैसा कि संतोष ने बम रखने के बाद किया भी। उसका मानना था कि घटना से पहले बम रखे होने की सूचना देने पर उसे हाईकोर्ट जज, जिला और पुलिस प्रशासन की सहानुभूति मिलेगी। इससे उसे हाईकोर्ट में स्थायी नौकरी भी मिल जाएगी, लेकिन वह अपने ही बुने जाल में फंस गया। 
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हाईकोर्ट में सीआरपीएफ और सिविल पुलिस का त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा है। इसके बावजूद आरोपी संतोष सुरक्षा व्यवस्था को धता बताकर गेट नंबर चार से हाईकोर्ट परिसर में घुस गया। संतोष ने बताया कि वह गेट नंबर चार से सुबह लगभग सवा दस बजे घुसा था। वह पॉलीथीन में पटाखा लेकर गया था। चूंकि वह रोजाना हाईकोर्ट आता-जाता था। इस कारण उस पर किसी ने शक नहीं किया। सीसीटीवी कैमरे में वह पॉलीथीन में कुछ लेकर घुसते हुए नजर आ रहा है। इसके बाद वह पॉलीथीन कॉरीडोर के पीछे स्थित स्टोर रूम के पास गया। जहां अक्सर सन्नाटा रहता है। वहीं पर उसने पटाखे से बम तैयार किया। फिर टिफिन में रखकर कोर्ट रूम में प्लांट कर दिया।

हाईकोर्ट के कोर्ट रूम में बम की सूचना पर पहुंचे पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की जांच और पूछताछ में संतोष पहली नजर में शक के दायरे में आ गया था। उसने बताया कि डेढ़ बजे ही टिफिन पड़ा देखा था तब ध्यान नहीं दिया। शाम तक जब टिफिन पड़ा रहा तो उसे शक हुआ और उसने हाईकोर्ट के एक परिचित कर्मचारी इस बारे में बताया। तब सूचना पुलिस को दी गई। एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि मौके पर जब उससे पूछा गया कि वह हाईकोर्ट में किस पद पर तैनात है तो वह सही पद नहीं बता पा रहा था। उसका आईकार्ड देखा गया तो उसकी वैधता खत्म हो चुकी थी। तभी वह शक के दायरे में आ गया था। पूछताछ में भी हर बार बयान बदलकर गुमराह कर रहा था। पूछताछ में उसने बताया था कि वह 55 नंबर कोर्ट रूम में तीन बार डेढ़ बजे, दो बजे और साढ़े चार बजे घुसा था। सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में वह कॉरीडोर में पॉलीथीन लिए घूमता नजर भी आया। पुलिस को उसने बताया कि वह कोर्ट रूम में नहीं घुसा था। जब गेट के साथ कोर्ट रूम के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई तो उसकी पोल खुल गई। 

संतोष हाईकोर्ट में पहले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी था। तब उसे आईकार्ड भी मिला था। गुरुवार को वह हाईकोर्ट कर्मचारियों जैसी ड्रेस पहनकर पुराना आईकार्ड गले में डालकर परिसर में गया। सुरक्षाकर्मियों ने कर्मचारी समझ कर उसकी चेकिंग नहीं हुई। यहीं सुरक्षा में चूक हुई और पूर्व कर्मचारी बम का सामान लेकर अंदर घुस गया फिर सूचना देकर सनसनी फैला दी।
सुरक्षा में लापरवाही बरतने वालों पर होगी कार्रवाई

एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि सुरक्षा में चूक के चलते ही संतोष परिसर में पटाखा लेकर घुसने सफल हुआ। इस मामले की जांच होगी कि गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों से कहां चूक हुई। जांच में जिसकी भी लापरवाही मिलेगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

एटीएस, एसटीएफ के साथ ही खुफिया एजेंसी(एनआईए,आईबी, एलआईयू) ने पकड़े गए आरोपी से घंटों पूछताछ की। फिर टिफिन में रखे गए बमों में प्रयुक्त बारूद क ी भी जांच की। हालांकि फोरेंसिक जांच के बाद ही पता चलेगा कि विस्फोटक में किस तरह के बारूद का इस्तेमाल किया गया।  

हाईकोर्ट के कोर्ट रूम तक बम पहुंचने की घटना से जिला और पुलिस प्रशासन के अफसरों की नींद उड़ी है। कड़ी चौकसी के बाद भी परिसर में बारूद का पहुंचना हाईकोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामी है। शुक्रवार को छुट्टी के कारण हाईकोर्ट बंद होने के बाद भी डीएम संजय कुमार, एसएसपी शलभ माथुर समेत अन्य अफसर हाईकोर्ट परिसर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

कोर्ट रूम में बम रखने की घटना के बाद अब हाईकोर्ट के गेट नंबर चार पर अतिरिक्त चौकसी बरती जाएगी। पहले सिविल पुलिस की ड्यूटी गेट पर साढ़े नौ बजे के बजाए अब आठ बजे से होगी। सुरक्षा के लिए अब अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी लगाए जाएंगे ताकि कोई भी व्यक्ति बिना चेकिंग के अंदर न जाने पाए। इसके अलावा उनके सामान की चेकिंग होगी। साथ ही डीएफएमडी से जांच के बाद ही कोई भी हाईकोर्ट परिसर में प्रवेश कर पाएगा। विशेष प्रवेश द्वार जब तक तैयार नहीं हो जाता, तब तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। कॉरीडोर में भी क्यूआरटी से जांच कराई जाएगी। ताकि जो भी परिसर में संदिग्ध दिखे उसकी जांच कर दबोचा जा सके।

संतोष राजरूपपुर मोहल्ले में बीवी और दो बच्चों के साथ किराए पर रहता है। पूछताछ में उसने बताया कि वह आठवीं तक पढ़ा है लेकिन उसकी बीवी एमए पास है। वर्तमान में उसे परिवार का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा था। इस कारण सरकारी नौकरी पाने के लिए उसने कोर्ट रूम में बम रखने की साजिश रची। 
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