एसटीएफ ने बुधवार को जीवन ज्योति हॉस्पिटल में वारदात के दौरान चैंबर में मौजूद रहे रीवा जनपद के एक चश्मदीद ब्रजेश पांडेय से दुबारा बात की। फोन पर ही उससे कत्ल से कुछ मिनट पहले चैंबर में हुए घटनाक्रम और उन लोगों का हुलिया पूछा। चश्मदीद के दुबारा बयान से भी यही बात सामने आई है कि घटना से कुछ ही देर पहले डॉ. बंसल ने दो-तीन संदिग्ध लोगों को सख्त लहजे में यह कहकर चैंबर से निकाल दिया था कि अभी काम नहीं हो सकता है। चश्मदीद ब्रजेश का कहना है कि गोलियां चलने से कुछ मिनट पहले वह अपने बीमार पिता वैद्यनाथ के अल्ट्रासाउंड की खातिर पर्ची कटवाने चला गया था। उसके चचेरे भाई हीरालाल और बहन माला ने शूटरों को भागते देखा था। उन दोनों ने जो हुलिया बताया वह चैंबर से भगाए गए दो-तीन लोगों के हुबहू समान था।
चश्मदीदों ने तो सिर पर मफलर बांधे शूटर के चेहरे पर कोई दाग भी देखने का दावा किया है। एसटीएफ को यह बात अखर रही है कि घटना के वक्त डॉक्टर के ठीक सामने मौजूद रहे कर्मचारियों शैलेंद्र पाठक, स्वदेश, प्रशांत ने कहा दिया कि वह शूटरों को नहीं देख सके। वे तीनों यह भी नहीं बता रहे हैं कि ड़ॉक्टर ने कत्ल से कुछ मिनट पहले दो या तीन लोगों को चैंबर से बाहर निकाला था।
आखिर वे तीनों इस तथ्य को क्यों छिपा रहे हैं? क्या वे शूटरों को पहले से जानते हैं इसलिए उनके बारे में बयान देने से घबरा रहे हैं। इसी वजह से इन कर्मचारियों को संदिग्ध मानते हुए सोचा गया कि अगर जल्द ही कोई ठोस सुबूत नहीं मिलता है तो उनका लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने पर विचार होगा। एसटीएफ से फोन पर बात करते हुए ब्रजेश ने बताया कि उसने पिता का अल्ट्रसाउंड कराने के लिए 850 रुपये की पर्ची बनवा ली थी लेकिन कत्ल होने के बाद अफरातफरी के बीच उसे पिता समेत हॉस्पिटल से बाहर कर दिया गया। वह चाहता है कि उसके 850 रुपये वापस दिलाए जाएं।
सौ से ज्यादा मोबाइल फोन के सर्विलांस और कॉल डीटेल हासिल करने के बाद भी कत्ल में कोई कनेक्शन नहीं जुड़ने से एसटीएफ के अफसर यह भी अनुमान लगा रहे हैं कि कहीं ऐसा तो नहीं कि शूटरों ने मोबाइल फोन का इस्तेमाल कॉल करने के लिए नहीं किया और उन्होंने व्हाट्स एप के जरिए अपने आका तथा अस्पताल में भेदिए से संपर्क बनाए रखा। अगर ऐसा है तो सर्विलांस के जरिए कोई सुराग मिलना मुश्किल हो जाएगा। एसटीएफ ने घटना के वक्त जीवन ज्योति हॉस्पिटल इलाके से हुए हजारों मोबाइल फोन को फिल्टर किया है लेकिन अभी तक कोई संदिग्ध मोबाइल नंबर हाथ नहीं लगा है।