सिविल लाइंस स्थित प्रधान डाकघर परिसर के भीतर जालसाजों की सक्रियता लगातार बनी हुई है। इस बार जालसाजों ने हरियाणा के दो व्यवसायियों को निशाना बनाते हुए उनको ढाई लाख रुपये का चूना लगा दिया। व्यवसायियों को जब ठगी का अहसास हुआ तब दोनों ने सिविल लाइंस थाने पहुंचकर दो जालसाजों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई हालांकि पिछली घटनाओं की तरह ही इस बार भी डाक विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे रहे।
हरियाणा, फरीदाबाद निवासी सतीश कुमार एवं लोकेश चावला के पास आरओ प्लांट मशीनरी की एजेंसी है। उन्होंने पुलिस को बताया कि पिछले माह उनके पास आरके शुक्ला नाम के व्यक्ति का फोन आया। खुद को डाककर्मी बताते हुए उसने बताया कि डाकघर परिसर में एक हजार लीटर के सात एवं दो हजार लीटर के तीन आरओ प्लांट लगने हैं। डाकघर के लेटर पैड पर व्यवसायियों को कार्य का विवरण भेजते हुए जालसाज ने कोटेशन मांगा गया। व्यवसायियों ने ई-मेल पर 50 लाख का कोटेशन भरकर भेज दिया। कुछ दिन बाद आरके शुक्ला नामक व्यक्ति ने फोन करके उनको इलाहाबाद बुलाया। दोनों इलाहाबाद पहुंचे तब डाकघर के भीतर जालसाज उनसे मिला। वह उनको पुरानी बिल्डिंग में बने पासपोर्ट सेवा केंद्र ले गया, जहां एसएन सिंह नामक व्यक्ति को अपना अधिकारी बताते हुए उनकी मुलाकात कराई गई।
यहां से चारों डाकघर के सामने स्थित एक होटल में गए। मांग के मुताबिक व्यवसायियों ने 52,500 रुपये शुक्ला को दे दिए। भरोसा बनाने के लिए शुक्ला ने रसीदी टिकट लगाकर एक रिसीविंग भी व्यवसायियों को दी। व्यवसायियों के मुताबिक, 12 जुलाई को फिर फोन करके उनको बुलाया गया और आरओ जारी करके के लिए दस फीसद नकद 1,94,880 रुपये कैश में ले लिया। यह पैसा लेकर वह दोनों गायब हो गए। व्यवसायियों का कहना है उसके बाद इनके मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ हो गए। दोनों ने डाकघर में आकर पता किया लेकिन ऐसे नाम के किसी व्यक्ति के बारे में कुछ पता नहीं चला। ठगी का अहसास होने पर व्यवसायियों ने सिविल लाइंस थाने पहुंचकर दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
डाकघर परिसर के भीतर से पहले भी जालसाज ठीक इसी तरह की जालसाजी कर चुके हैं लेकिन डाकघर अधिकारी इसको लेकर खामोश हैं जबकि जिस तरह से ठगी की जा रही उससे कुछ डाककर्मियों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता। कुछ वर्ष पहले भी एक कंपनी के प्रतिनिधियों से लाखों रुपये की ठीक इसी तर्ज पर हुई थी। उस दौरान भी जालसाज डाकघर के भीतर बाकायदा अंदर कुर्सी में बैठा हुआ था। इस बार भी व्यवसायियों ने पुलिस को बताया कि एक जालसाज पासपोर्ट सेवा केंद्र के भीतर कुर्सी पर बैठा हुआ था, जिस वजह से उन लोगों ने यकीन करके पैसे दे दिए। वहीं, डाकघर अधिकारी पिछली घटनाओं की तरह इस बार भी कुछ बोलने को राजी नहीं हैं। इस बारे में पीएमजी एयू अब्दाली से संपर्क करने की कई कोशिश की गई लेकिन उन्होंने बात नहीं हो सकी।