नैनी जेल गेट पर ज्ञानचंद्र समेत दो लोगों की हत्या और शेरडीह गांव में मंगलवार को हुए बवाल के बाद बुधवार को पूरे गांव में सन्नाटा पसरा रहा। पुलिस बल की मुस्तैदी गांव के बाहर रही। ज्ञानचंद्र यादव के घर में भी खामोशी छाई रही। मंगलवार के उपद्रव के बाद से ज्ञानचंद्र की मां ग्राम प्रधान सरस्वती देवी और बड़े भाई संतोष का कोई अता-पता नहीं है। घर में संतोष की पत्नी ममता तथा बड़ी बहन प्रमिला अपनी ढाई साल की बेटी को सीने से लगाए आंसू बहाती रही। घर के बाहर हर आहट पर ममता और प्रमिला का कलेजा कांप उठता वे मारे गए ज्ञानचंद्र को यादकर रोने-बिलखने लगती। इन महिलाओं की गुहार सुनने वाला कोई नहीं है। उल्टा पुलिस को देखते ही वे दोनों खौफ से भर जाती हैं।
शेरडीह गांव के पूर्व प्रधान चंद्रभान यादव बाबा के चार पुत्र तथा एक बेटी है। चंद्रभान और उसका सबसे बड़ा पुत्र राजकुमार डबल मर्डर में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। दूसरा बेटा राजेश फरार चल रहा है। बाकी दो संतोष और ज्ञानचंद्र सजा काटकर बाहर आ गए थे। रविवार को वे दोनों नैनी जेल में पिता चंद्रभान से मिलने के बाद लौट रहे थे तभी शूटरों ने फायरिंग की। ज्ञानचंद्र समेत दो लोग मारे गए। पांच घायल हुए। ज्ञानचंद्र की अंत्येष्टि में पिता चंद्रभान को जेल से नहीं लाने पर परिजनों और ग्रामीणों ने मंगलवार को शव रखकर चक्काजाम के साथ ही पुलिस पर फायरिंग और पथराव किया था।
हमले में आईपीएस गणेश साहा के घायल होने के बाद पुलिस ने पलटवार करते हुए 32 महिलाओं-पुरुषों को बंदी बनाया साथ ही घरों में घुसकर कहर बरपाया। मंगलवार दोपहर की घटना के बाद से शेरडीह में तनाव के बीच सन्नाटा छाया रहा। पुलिस फोर्स और पीएसी की टुकड़ी गांव के बाहर मुस्तैद रही। आलम यह है कि बवाल में मुकदमा दर्ज होने के बाद से पीड़ितों के साथ ही आरोपी परिवारों के भी पुरुष फरार हो गए हैं। मारे गए ज्ञानचंद्र के घर में बुधवार दोपहर उसकी भाभी ममता पत्नी संतोष और बहन प्रमिला अपनी ढाई साल की बेटी आराध्या को गोद में लिए रोते-बिलखते दिखी। ममता का पति संतोष और सास ग्राम प्रधान सरस्वती देवी मंगलवार दोपहर से ही लापता हैं।
ममता और प्रमिला गमगीन हैं और बुरी तरह सहमी भीं। प्रमिला ने रोते हुए कहा कि एक तो उनका भाई मारा गया ऊपर से मां और भाई दूसरा भाई संतोष लापता हैं। वे दोनों पुलिस को देखते ही घबरा जाती हैं। पत्रकारों से बोलती हैं- ऐ भइया, आप यहीं खड़ा रहें नाहि त पुलिसन परेशान करै लगिहैं। खाकी को देखते ही उनके चेहरे पर अजीब सा डर और खामोशी छा जाती है।
मारे गए ज्ञानचंद्र के परिवार की महिलाओं ने आरोप लगाया कि मंगलवार दोपहर छोपमारी के दौरान पुलिसवालों ने घर लाखों रुपये के आभूषण और नगदी लूट ली। ज्ञानचंद्र की भाभी ममता तथा बहन प्रमिला ने बताया कि ऊपर के कमरे के बक्से में तकरीबन 35 लाख रुपये के आभूषण रखे थे। मंगलवार की दोपहर छापेमारी के दौरान पुलिस ने जमकर तांडव मचाया। साथ ही आभूषण और बक्से में रखे तकरीबन 30 लाख रुपये भी उठा ले गए। बताया कि तीन दिन पहले जमीन के एक सौदे में ज्ञानचंद्र ने नगदी लाकर घर में रखी थी।
चक्काजाम के दौरान हुए बवाल में पुलिस की लाठी से जख्मी संतोष की बहन प्रमिला भी रात भर गायब रही। उसने ढाई साल की बेटी आराध्या को अपनी भाभी ममता के पास छोड़ दिया था। जख्मी प्रमिला रात भर दर्द से कराहती रही। उसकी ढाई माह की मासूम आराध्या बिन मां के रात भर बिलखती रही। ममता ने बताया कि पुलिसवालों ने रसोई में रखा दूध भी फेंक दिया था। बच्ची को दूध भी नसीब नहीं हो सका।
मारे गए ज्ञानचंद्र की बहन प्रमिला ने बताया कि भईया को सप्ताह भर पहले से मौत के सपने आने लगे थे। इस बात का जिक्र उसने मां सरस्वती से भी किया था। शायद यही वजह थी कि घर के बाहर हमेशा चारपाई डालकर सोने वाला ज्ञानचंद्र कुछ दिनों से पक्के मकान के ऊपरी मंजिल के कमरे में सोने लगा था। उसे अंजान भय सताए जा रहा था। भाभी ममता ने बताया कि वह आधी रात तक कमरे के बाहर टहलता रहता था।
मारे गए ज्ञानचंद्र की शादी के लिए परिजनों ने लड़की देखनी भी शुरू कर दी थी। सर्दियों में परिजन उसका विवाह करने की तैयारी में थे। बहन प्रमिला ने बताया कि भईया ने चार लड़कियां देखी थीं लेकिन कोई पसंद नहीं आई। एक जगह बात तेजी से चल रही थी। तय होने पर दिसंबर में विवाह की तैयारी परिजनों ने की थी।