इलाहाबाद। बिहार के सारन जिले से अपहरण किए एक बच्चे को आरपीएफ ने दिल्ली-दरंभगा स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस से बरामद किया। ट्रेन में गश्त के दौरान आरपीएफ को बच्चे के अकेले बैठे होने पर शक हुआ। पूछताछ के दौरान बच्चे के पास से एक मोबाइल नंबर भी मिला। आरपीएफ के जवानों ने इस नंबर पर संपर्क किया तो बच्चे के अपहरण का पता चला। आरपीएफ शनिवार सुबह बच्चे को इलाहाबाद जंक्शन लाई। सूचना पर बच्चे के चाचा और जांच अधिकारी दिन में जंक्शन पहुंचे। बच्चा उन्हें सुपुर्द कर दिया गया।
दिल्ली से दरभंगा जाने वाली ट्रेन में गश्त के दौरान आरपीएफ को एक बोगी में अकेला बैठा बच्चा दिखा। पूछताछ में तकरीबन 12 वर्ष के बच्चे ने अपना नाम विवेक कुमार और पिता का नाम धनंजय सिंह बताया। पूछताछ के दौरान बच्चे के पास से एक मोबाइल नंबर भी मिला। आरपीएफ ने मोबाइल नंबर पर संपर्क किया तो उधर से बताया गया कि बच्चा उनका है और 28 अक्तूबर को बिहार में मतदान के दौरान उसका अपहरण हुआ था। फोन पर संपर्क में यह भी पता चला कि विवेक सारन जिले के ग्राम मूसेपुर थाना डोरीगंज क्षेत्र का है।
विवेक के पिता उप प्रधान भी हैं। पिता ने 28 अक्तूबर को ही डोरीगंज थाने में विवेक के अपहरण की एफआईआर दर्ज करा दी थी। फोन पर जानकारी मिलने के बाद जवानों ने इसकी सूचना आरपीएफ इंस्पेक्टर अर्जुन यादव को दी। इस बीच आरपीएफ विवेक को इलाहाबाद जंक्शन ले आई।
इंस्पेक्टर यादव ने डोरीगंज थाने फोन किया। वहां से जांच अधिकारी बाल कृष्ण सिंह एवं विवेक के चाचा अर्जुन सिंह दिन में इलाहाबाद पहुंचे। यहां पूछताछ में विवेक ने अलग-अलग कहानी बताई। पहले बताया कि उसके माता-पिता ट्रेन में छोड़कर छपरा में उतर गए और वह दिल्ली पहुंच गया। फिर बताया कि मतदान के दिन गांव के आश्रम गया था। उसके बगल में एक कब्रिस्तान हैं, जहां सुशील नाम का व्यक्ति मिला जो उसे लेकर दिल्ली चला गया। फिर बताया कि दोस्त के साथ निकले थे और गलती से दिल्ली वाली ट्रेन में बैठ गए और अब लौट रहे हैं। फिलहाल विवेक को चाचा और जांच अधिकारी के सुपुर्द कर दिया गया।