बाहर से घूमने आने वाले पर्यटकों को संगम के परेड मैदान में वर्दी का खौफ दिखाकर लूटपाट करने वाले गैंग को पुलिस ने दबोच लिया। पुलिस ने कुल सात बदमाशों को पकड़ा है। इनमें से तीन ट्रैफिक पुलिस के होमगार्ड निकले। एक बदमाश पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा। पुलिस ने तलाशी में आरोपियों के पास से आठ मोबाइल, लूट में प्रयुक्त बाइक और 5400 रुपये बरामद किया है। पकड़े गए लुटेरों ने दो जून को मंगलौर सिटी से आए कारोबारी जमीर अहमद को लूटा था। कारोबारी ने लूट के बाद बताया था कि वह गाइड विनोद के साथ संगम पहुंचा था तभी एक बाइक से तीन वर्दीधारी युवक आए। पहले तो वर्दी का खौफ दिखाकर रौब गांठा और चेकिंग के बहाने बैग लेकर फरार हो गए। गाइड विनोद भी लुटेरों के साथ चला गया था। इससे यह तय हो गया था कि विनोद ने पूरी साजिश रची है। दारागंज थाने में तीन वर्दीधारी बदमाशों और विनोद के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
दारागंज इंस्पेक्टर बीपी त्रिपाठी को मुखबिरों और सर्विलांस के जरिए सूचना मिली कि पर्यटकों से लूट करने वाला गिरोह संगम में किसी शिकार की तलाश में मौजूद है। इस सूचना पर इंस्पेक्टर ने एसआई सभाजीत मिश्र, सिपाही सर्वेश त्रिपाठी, देवेंद्र कुमार संतोष और बृजभान सिंह के साथ शनिवार सुबह घेरेबंदी कर प्रतापगढ़ में आसपुर देवसरा के बैजलपुर गांव के अवधेश कुमार निषाद, जौनपुर में बदलापुर के सिरवादापुर गांव के विनोद कुमार बिंद, जौनपुर में ही लखनीपुर के अशोक कुमार उर्फ गोली केवट, जौनपुर जिले के हरखू थाना बकसा निवासी देवेंद्र कुमार बिंद, नैनी के लोकापुर निवासी मनोज कुमार, सचिन कुमार तिवारी निवासी चक हीरानंद नैनी और सुशील कुमार तिवारी धरौली सरायइनायत को दबोच लिया।
जबकि सर्वेश बिंद निवासी गढ़ा बाघराय थाना बक्शा जौनपुर पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। पूछताछ में पता चला कि विनोद कुमार बिंद मंगलौर में प्राइवेट नौकरी करने गया था। वहीं पर उसकी कारोबारी जमीर अहमद से मुलाकात हुई थी। उसने जमीर को इलाहाबाद, वाराणसी घुमाने के लिए बुलाया था। वह उन्हें वाराणसी घुमाने के बाद संगम ले गया था। पूछताछ में उसने कबूला कि एक माह पहले विनोद ने गाइड बनकर पूना के एक व्यवसायी से डेढ़ लाख लूटे थे। लेकिन इस मामले की रिपोर्ट नहीं हुई थी।
पकड़े गए गिरोह में सुशील कुमार बिंद, सचिन तिवारी, मनोज ट्रैफिक पुलिस में होमगार्ड हैं। इस गैंग का सरगना अवधेश कुमार बिंद है और वह विनोद का रिश्तेदार हैं। इस गिरोह ने जौनपुर में लूट की तीन और शहर में पर्यटक को लूटने की दो वारदात को कबूला है। होमगार्डों के लूट में पकड़े जाने के बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गई। एक होमगार्ड के ससुर एक बड़े अफसर के अर्दली हैं। उसे छुड़ाने के लिए दबाव आया, लेकिन बात नहीं बनी। पूछताछ में पता चला कि लूट की रकम में सबसे ज्यादा हिस्सा अवधेश और विनोद लेते थे। इसके बाद देवेंद्र और अशोक को मिलता था, जबकि ट्रैफिक होमगार्डों को एक वारदात पर पांच से स हजार रुपये ही मिलते थे।
लूट में पकड़ा गया देवेंद्र कुमार बिंद ने बीपीएड किया है। वह शिक्षक बनना चाहता था, लेकिन जब कई बार प्रयास के बावजूद वह शिक्षक नहीं बन तो यह राह पकड़ ली।
डीआईजी सर्विलांस सेल के प्रयास से हुआ खुलासा
- डीआईजी विजय यादव ने कमान संभालने के बाद अखबारों की क टिंग देख रहे थे। इस खबर को देखकर उन्होंने अपनी सर्विलांस टीम के इंस्पेक्टर ओपी त्रिपाठी, एसआई विनोद कुमार सिंह, सिपाही पंकज दुबे और जुल्कर नैन को घटना के खुलासे में लगाया। एसआई विनोद कुमार सिंह ने बताया कारोबारी जमीर अहमद के मोबाइल में गाइड बने एक लुटेरे विनोद और एक अन्य लुटेरे की फोटो थी। इसके अलावा सर्विलांस की मदद बदमाशों क ो चिह्नित कर लिया गया। डीआईजी के निर्देश पर दारागंज पुलिस ने गिरोह को पकड़ा।