रास्ते के विवाद में गई महिला की जान
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राजू पाल हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई टीम ने सुलेम सराय में एक खटाल मालिक समेत चार दुकानदारों को उठाकर घंटों पूछताछ की है। चारों घटना के समय घटनास्थल के पास ही मौजूद थे। सीबीआई अब जिन लोगों से पूछताछ करने जा रही हैं, उनमें घटना के समय तैनात आईपीएस भी हैं। उनमें से एक रिटायर भी हो चुके हैं। जल्द ही दोनों से पूछताछ होगी।
राजू पाल हत्याकांड में सीबीआई की जांच काफी आगे बढ़ गई है। इससे पहले भी टीम ने सुलेम सराय में घटनास्थल पर जाकर मैपिंक की थी। कुछ दिन पहले सीबीआई टीम ने सुलेम सराय में रिक्शा खटाल चलाने वाले गुड्डू भारतीय समेत चार लोगों को पूछताछ के लिए उठाया था। चारों को सर्किट हाउस लेकर जाकर घंटों पूछताछ होती रही। घटना के समय चारों ही दुकानदारों की दुकानें खुली हुई थीं, और वे मौके पर ही मौजूद थे। इसी कारण उन्हें प्रत्यक्षदर्शी माना जा रहा है।
चारों से घटना के एक एक पल का ब्योरा लिया गया। थाने की जीडी और एफआईआर में जो भी तथ्य दर्ज थे। चारों के बयानों से उनका मिलान भी किया गया। करीब चार घंटे बाद चारों को छोड़ दिया गया लेकिन कहा गया है कि उनसे आगे भी पूछताछ की जाएगी। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इलाहाबाद में तमाम लोगों से पूछताछ हो गई है। अब बयानों का मिलान किया जा रहा है कि कहीं कोई विरोधाभास तो नहीं है। जहां भी विरोधाभास आ रहे हैं, उनसे दोबारा पूछताछ की जा रही है। इस मामले में कुछ दिन पहले दो डाक्टरों को आमने सामने बिठाकर पूछताछ की गई थी। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि राजू पाल हत्याकांड में घटना के समय इलाहाबाद में तैनात दो आईपीएस भी पूछताछ की जाएगी। दोनों उस समय अहम पदों पर थे।
सीबीआई ने जब सुलेमसराय के चारों दुकानदारों को उठाया तो उनके घर वाले घबरा गए कि सीबीआई उन्हें पकड़ ले गई है। वे भागकर पूर्व विधायक पूजा पाल के प्रतिनिधि के पास मदद की गुहार लगाते हुए पहुंच गए। बाद में सीबीआई से संपर्क कर घर वालों को बताया गया कि उन्हें सीबीआई सिर्फ पूछताछ के लिए ले गई है। कुछ देर में छोड़ दिया जाएगा।
अलकमा हत्याकांड में पांच हजार के ईनामी एजाज अख्तर ने सोमवार को पुलिस को गच्चा देकर सरेंडर कर दिया। अतीक अहमद का साथी एजाज राजू पाल हत्याकांड में भी आरोपी है। अलकमा हत्याकांड में इनामी होने के बाद धूमनगंज पुलिस और क्राइम ब्रांच उसे खोज रही थी। पुलिस सोच रही थी कि वह सरेंडर एप्लीकेशन देगा लेकिन एजाज ज्यादा शातिर निकला, उसने सरेंडर एप्लीकेशन के बजाय एक पुराने मामले में वारंट तुड़ाया और न्यायालय में सरेंडर कर दिया।