बसपा नेता राजेश यादव की दो अक्तूबर की देर रात ताराचंद हास्टल के बाहर हुई हत्या की गुत्थी सुलझाने की कोशिश में मंगलवार को फोरेंसिक वैज्ञानिक लैब के विशेषज्ञों की टीम ने हत्या का सीन दोहराया। थाने के बाहर खड़ी गाड़ी का आधा घंटे तक निरीक्षण किया। घटनास्थल ताराचंद हास्टल परिसर में करीब एक घंटे तक क्राइम सीन का रिकंस्ट्रक्शन किया गया।
एक्सपर्ट टीम ने थाने के बाहर खड़ी राजेश यादव की गाड़ी में जगह-जगह लगे खून के धब्बों के नमूने लिए। खून से सनी सीट को काटकर नमूने में शामिल किया। गाड़ी के गोलियों के कारण हुए छेद से बारूद का सैंपल लिया। पीछे टूटे शीशे और कई गोलियों के निशान की बारीकी से पड़ताल की गई।
करीब तीन घंटे की जांच पड़ताल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेकर टीम लखनऊ चली गई। टीम के डिप्टी डायरेक्टर एके श्रीवास्तव का कहना है कि वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर करीब पंद्रह दिन में जांच कराके एसएसपी को रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
एक घंटे तक हुआ क्राइम सीन का रिकंस्ट्रक्शन
सीन के रिकं स्ट्रक्शन में गोली मारने वाले स्थान से लेकर करीब डेढ़ सौ मीटर तक गाड़ी चलाने का ट्रायल कराया गया। इस दौरान गोली मारने की स्टाइल, पथराव और पीछे से गाड़ी पर हुई फायरिंग के सीन को दोहराया गया। उसी के साथ-साथ करीब 50 मीटर तक राजेश के घायल हालत में गाड़ी चलाने और उसके बाद डा. मुकुल की तरह ही राजेश के बराबर से गाड़ी चलाई गई।
पत्नी का आरोप, हत्या कर राजेश का शव गाड़ी में रखा
टीम के सामने बयान में राजेश यादव की पत्नी मोनिका यादव ने आरोप लगाया है कि हत्या कहीं और की गई है। बाद में शव को गाड़ी में रखा गया है। अन्यथा गाड़ी पर पत्थर फेंकने और गोली चलने के बावजूद नामजद आरोपी डा. मुकुल के खरोच नहीं आई। यह अहम बात है। जबकि राजेश पर रॉड आदि से हमला किया गया। पोस्टमार्टम में चोट के निशान भी दिखाए गए हैं। उन्होंने इस हत्या कांड में पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है।
डा. मुकुल ने दोहराया पुराना बयान
हत्या में नामजद आरोपी डा. मुुकुल ने एफएसल के उप निदेशक एके श्रीवास्तव और उनकी टीम के सामने बयान में पुराना बयान दोहराया। वही बयान दो पेज में लिखित में दिया है। जिसमें राजेश यादव के साथ गाड़ी में बैठ कर ताराचंद हास्टल आए। वहां छात्रों से झगड़े में गोली चलने के कारण राजेश की मौत हुई है।