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चौकी तहस-नहस, हाथ जोड़ मनाते रहे थानेदार

Fri, 21 Jul 2017 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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उग्र कांवड़ियों ने सड़क पर तांडव किया और पुलिस चौकी तहस-नहस कर दी लेकिन पुलिस फोर्स लाचार देखती रही। सीओ समेत थाना प्रभारी हमले में घायल हो गए लेकिन वे हाथ जोड़कर कांवड़ियों से शांत होने की मिन्नत करते रहे। आलम यह रहा कि तकरीबन 80 कांवड़िए तीन घंटे तक उपद्रव करते रहे लेकिन पुलिस उन्हें काबू में नहीं कर सकी। जमकर उत्पात के बाद कावंड़िए खुद वहां से लूटपाट कर गए तब पुलिस ने जाम खत्म कराया। इस घटना ने कांवड़ यात्रा के दौरान शांति-व्यवस्था लेकर एक महीने पहले से शासन स्तर से जोर-शोर से चल रही तैयारियों पर सवाल उठे हैं। पुलिस अफसर भी सकते में हैं।
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कांवडियों की भीड़ भोर में करीब सवा पांच बजे से नौ बजे तक  जीटी रोड पर बवाल करती रही लेकिन पुलिस तमाशबीन बनी रही। हंडिया सीओ बृजनारायण सिंह और इंस्पेक्टर आरपी सिंह खबर पाकर करीब छह बजे बरौत चौराहे पर पहुंचे तो उन्हें कांवडियों की भीड़ घेरकर पीटने लगी। ऐसे में सीओ और इंस्पेक्टर को खेतों में कूदकर भागना पड़ा। कांवड़िए ने गाड़ियों में तोड़फोड़ शुरू की तो वहां आकर सीओ और इंस्पेक्टर ने हाथ जोड़ कांवड़ियों को मनाने का प्रयास किया। कांवड़ियों में अफवाह फैल गई थी कि घायल कांवड़िए मुकेश की मौत हो गई है।

इंस्पेक्टर ने कांवड़ियों को भरोसा दिलाया कि मुकेश अस्पताल में भर्ती है। उन्होंने यहां तक कहा कि वे चाहें तो अस्पताल में भर्ती मुकेश से फोन पर बात कर लें लेकिन कांवड़ियों ने उनकी बात ही सुनने से साफ इनकार करते हुए पथराव कर दिया। हमले में सीओ और इंस्पेक्टर के अलावा दरोगा और सिपाही जख्मी हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया तो कांवड़ियों ने पुलिस चौकी में भी घुसकर आगजनी और तोड़फोड़ कर दी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब साढ़े आठ बजे कांवड़ियों ने एक ट्रक का तिरपाल फाड़कर फलों की पेटियां लूटीं तो बवाल थमा वरना पुलिस तो तमाशा ही देख रही थी। सवाल उठता है कि आखिर इतनी तैयारी के बावजूद कांवड़ियों को तीन घंटे तक काबू में क्यों नहीं किया जा सका। अतिरिक्त पुलिस बल कहां था?
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कांवड़ियों ने तीन घंटे में जमकर तोड़फोड़ करते हुए सौ से ज्यादा वाहनों को नुकसान पहुंचाया। इसी दौरान पुलिस चौकी के पास जाम में फंसे गैस टैंकर में आग लगाने की कोशिश की। उसके फ्यूल टैंक में पुआल भर दिया लेकिन आग नहीं लगा सके क्योंकि स्थानीय लोगों ने सामने आकर विरोध किया। लोगों ने कहा कि गैस टैंकर में विस्फोट हुआ तो पूरे कस्बे में तबाही मच जाएगी। सबकी जान खतरे में आ जाएगी। कस्बे वालों के विरोध पर कांवड़िए वहां से हटकर चौकी में घुस गए।

कांवड़ियों के तांडव का शिकार कारों और बसों में यात्रा कर रहे सैकड़ों लोग हुए। कांवड़ियों ने ईंट-पत्थरों की बौछार कर कई एसी बसों के कांच चूर कर दिए। दर्जन भर से ज्यादा कारों को नुकसान पहुंचा। दर्जनों ट्रक क्षतिग्रस्त हुए। बसों पर हमला हुआ तो चीख-पुकार मच गई। उनमें बैठे महिलाए-पुरुष जान बचाने के लिए बसों से उतरकर भागने लगे। कई लोग पत्थर लगने से जख्मी हुए। महिलाएं और बच्चे भी भागने में गिरकर घायल हुए। बस यात्री तीन घंटे तक भयभीत दूर खड़े रहे। उन्हें यह भी भय सता रहा था कि कहीं बस न जला दी जाए वरना उनके बैग-अटैचियां भी जल जाएंगी। हालांकि गनीमत है कि बसों में आगजन नहीं की गई।

कांवड़ियों ने चौकी प्रभारी बरौत नीलेश पांडेय की वैगन आर कार भी जला दी। पता चला कि दरोगा नीलेश को यह सेकंड हैंड एक व्यक्ति से खरीदनी थी। वह उसे ट्रायल के लिए लेकर चौकी गए थे। मगर कांवड़ियों ने कार जला डाली। कार का इंश्योरेंस भी नहीं था जिससे दरोगा के लिए मुश्किल हो गई है। इसी तरह चौकी में कांवड़ियों ने कई सिपाहियों की बाइक भी तोड़ डाली। चौकी में बेवजह तबाही मचाने के कांवड़ियों के दुस्साहस और नुकसान से पुलिसकर्मियों में नाराजगी है। बवाल के बाद ग्राम प्रधान बरौत के पति छेदीलाल जायसवाल ने तोड़ा गया पुलिस का अस्थायी कैंप दुबारा तैयार कराकर कुर्सियों समेत दूसरे सामान का इंतजाम कराया।

इस बवाल में चौकी प्रभारी बरौत नीलेश तिवारी ने आईपीसी की धारा 332, 353, 435, 427, 337, 336, 353 और सेवन सीएलए एक्ट के तहत
80 अज्ञात कांवड़ियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इसके अलावा चार बस और दो ट्रक चालकों से भी तहरीर ली गई है। मगर मुकदमा दर्ज होने के बावजूद दोषी कांवड़ियों पर कार्रवाई मुश्किल है क्योंकि वे सभी बाहरी थे जिनको चिन्हित भी कर पाना आसान नहीं होगा। पुलिस ने किसी को मौके से पकड़ा भी नहीं।
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