ट्रेवलर लेकर वाराणसी जा रहे रामजीत यादव तीन दिन तक रीवा रोड पर जाम में फंसे रहे। मामा भांजा तालाब से नैनी पुल पार करने में ही उन्हें 40 घंटे से अधिक समय लग गया। अपनी पीड़ा बताते-बताते रामजीत रो पड़ते हैं। उनका कहना था कि बृहस्पतिवार की रात वह कुछ दूर ही चले थे कि नो इंट्री लग गई।
वहीं दो दिन से फंसे ललित का कहना था कि खाना-पीना तो दिन दैनिक दिनचर्या तक का कष्ट है। वह कहते हैं, दो दिन से आदमी एक ही जगह फंसा हो तो उसकी परेशानी समझी ही जा सकती है।’ रामपुर बाजार में परिवार के साथ चार घंटे तक जाम में फंसे रहे वीरेंद्र कुमार पांडेय का बेटा बीमार हो गया। वह बारात से लौट रहे थे। ये दर्द सिर्फ रामजीत, ललित या वीरेंद्र का नहीं है, रीवा रोड से हर रोज गुजरने वाले हजारों लोगों का है। अनियंत्रित आवागमन तथा नो इंट्री की गलत व्यवस्था की वजह से वहां जाम की स्थाई समस्या हो गई है। टोल टैक्स तथा ट्रकों से अवैध वसूली ने मुसीबत और बढ़ा दी है। एक रोड पर हमेशा वाहनों की लंबी कतार लगी रहती है।
पुलिस पर वसूली का भी आरोप है। चंद रुपये की लालच मेें भारी वाहनों को नो-इंट्री प्वाइंट से छोड़ दिया जा रहा है। इसके चलते जाम की समस्या और बढ़ गई है।
शहर में नो-इंट्री लागू होने के बाद अधिकांश भारी वाहन कौशाम्बी को जोड़ने के लिए प्रतापपुर गांव के समीप यमुना नदी पर बने पीपा के पुल से सीमा पार हो रहे हैं। शुक्रवार की रात में पीपे पुल पर सैकड़ों भारी वाहनों का काफिला अचानक रुक गया। इससे करीब तीन घंटे पुल पर जाम लगा रहा। चंद रुपये की लालच में पुल की देखरेख करने वाले ठेकेदार के गुर्गे भारी वाहनों को छोड़ देते हैं। इससे हादसे की आशंका बन गई है।
नो-इंट्री लागू होने के बाद भी रामपुर से लेप्रोसी चौराहा नैनी तक हमेशा वाहनों का काफिला लगा रहता है। बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े होने से जाम की समस्या और बढ़ गई है। नो-इंट्री प्वाइंट से भारी वाहन कैसे निकाल दिए जाते हैं, इसे लेकर तमाम तरह की चर्चा हैं।
नो-इंट्री प्वाइंट से भारी वाहनों को छोड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण जाम लग रहा है। रूट डायवर्जन के लिए विकल्प की तलाश की जा रही है। रामपुर से मांडा तक मुख्य मार्ग पर वाहनों को खड़ा करने के लिए प्रतिबंधित किया जाएगा।
- दीपेंद्र नाथ चौधरी, एसपी यमुनापार।