कानपुर में हुए ट्रेन हादसे में सरायइनायत के अलमापुर गांव की बुजुर्ग शकुंतला देवी (68) की जान चली गई। उनके पति भी गंभीर घायल हुए जबकि बेटी-दामाद जख्मी हैं। वे गुजरात में तीर्थयात्रा के बाद लौट रहे थे। अस्पताल से यहां घर में फोन आया तो परिवार में कोहराम मच गया। बेटे-बेटियों समेत रिश्तेदार रोने-बिलखने लगे। बेटे समेत कुछ रिश्तेदार कानपुर रवाना हो गए। उनके गांव में भी शोक छाया है।
अलमापुर गांव निवासी किसान श्यामदत्त पांडेय के दो बेटे हैं संतोष और कमलेश। चार बेटियां हैं। बड़ी बेटी देवसुता का ब्याह सोरांव में रैया गांव निवासी रेलवे अफसर शिवानंद दुबे से किया गया था। शिवानंद की तैनाती वाराणसी स्थित डीजल रेल कारखाना (डीरेका) में है। 11 नवंबर को श्यामदत्त पत्नी शकुंतला के साथ वाराणसी में बेटी-दामाद के पास गए। वहां से वे सभी गुजरात में तीर्थयात्रा पर निकल गए थे। शनिवार शाम वे इंदौर-पटना एक्सप्रेस से वाराणसी लौट रहे थे। मगर ट्रेन कानपुर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। सुबह श्यामदत्त के बेटे कमलेश को कानपुर के अस्पताल से फोन आया। उसे बताया गया कि ट्रेन हादसे में उसकी मां शकुंतला देवी की मौत हो गई है।
पिता श्यामदत्त गंभीर रूप से घायल हैं। जबकि उनके बेटी-दामाद को हल्की चोट पहुंची है। इस खबर से घर में सभी स्तब्ध रह गए। पूरे गांव में हल्ला मच गया। सभी गमगीन हो गए। मां की मौत और पिता श्यामदत्त के घायल होने की जानकारी मिलते ही बाकी तीन बेटियां सरस्वती, माया, विद्योत्तमा भी रोते-बिलखते मायके आ गईं। बेटे-बेटियों को माता-पिता के तीर्थयात्रा से लौटने का इंतजार था मगर आई मनहूस खबर। एक पुत्र कमलेश कुछ रिश्तेदारों संग कानपुर के लिए रवाना हो गया। शाम को अमर उजाला टीम मृत महिला के घर पहुंची तो सभी शोक में डूूबे थे। परिजनों ने बताया कि रिश्तेदार आधी रात तक कानपुर से शव लेकर आएंगे।