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डफरिन अस्पताल में नवजात की मौत, हंगामा

Thu, 18 Jan 2018 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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जिला महिला चिकित्सालय डफरिन में बुधवार को दो दिन पहले जन्मी नवजात की मौत पर हंगामा हो गया। परिजनों ने डॉक्टरों पर गलत टीका लगाने और लापरवाही का आरोप लगाया। सूचना पर वहां पहुंची शाहगंज पुलिस ने लोगों को किसी तरह समझाकर शांत कराया। प्रसूता के पति ने अज्ञात डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस ने बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं, सीएमओ ने डफरिन की अधीक्षक से मामले की जानकारी लेकर मामले की जांच कराने के  निर्देश दिए हैं। इसके लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है।
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मुट्ठीगंज के मालवीय नगर निवासी सूरज ने सोमवार की दोपहर एक बजे अपनी गर्भवती पत्नी रेनू साहू को डफरिन अस्पताल में भर्ती कराया था। उसी दिन रात 12.30 बजे रेनू ने एक बच्ची को जन्म दिया। डॉक्टरों के मुताबिक नवजात कुछ कमजोर थी। उसे न्यू बॉर्न बेबी केयर यूनिट (एनआईसीयू) में रखने के लिए कहा गया। इस पर रेनू और उसके पति नहीं मानें। सलाह के मुताबिक बच्ची को मां का दूध न देकर बाहर का दूध पिलाया गया। जबकि सूरज के मुताबिक मंगलवार को नवजात ठीक थी। आरोप लगाया कि बुधवार को बच्ची को टीका लगाया गया। उसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। सूचना के बाद भी डॉक्टरों ने ठीक से देखरेख नहीं की। इलाज में लापरवाही के कारण बच्ची की मौत हो गई।

नवजात की मौत के बाद प्रसूता रेनू तो रोने-बिलखने लगी। वहीं वार्ड के बाहर सूरज और उसके रिश्तेदार हंगामा करने लगे। डॉक्टर और नर्सों ने घबराकर वार्ड के दरवाजे बंद कर लिए। सूचना पाकर एसओ शाहगंज गजानंद फोर्स के साथ वहां पहुंचे। हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराकर रेनू और सूरज के साथ अन्य लोगों को थाने ले जाया गया। जहां सूरज ने डॉक्टरों पर केस लिखाने को तहरीर दी। किसी डॉक्टर का नाम न होने से पुलिस ने अज्ञात डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। एसओ के मुताबिक पीएम रिपोर्ट के आधार पर मुकदमे की धारा में परिवर्तन की जाएगी।
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डफरिन की अधीक्षक डॉ. मनीषा गुप्ता के मुताबिक प्रसूता रेनू और नवजात के इलाज में किसी तरह की कोई कमी नहीं की गई। रेनू और उनके पति को बच्ची की हालत के बारे में बताकर एनआईसीयू में रखने को कहा गया था। दोनों ने इससे इनकार करते हुए बच्ची को मां के बजाए बाहर का दूध पिलाया। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति ने बच्ची को देखा था। डॉक्टर के मुताबिक सांस की नली में दूध फंसने से बच्ची को दिक्कत हुई। संभवत: उसकी जान जाने का कारण वही रहा हो। उन्होंने कहा कि टीका लगाने से किसी की मौत नहीं होती। जीवन रक्षक टीके बच्चों को सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं। आरोप बेबुनियाद हैं, पोस्टमार्टम में स्थिति साफ हो जाएगी।
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