महानगरी एक्सप्रेस के टायलेट में टाइम बम रखने वाले अपराधियों की तलाश में लगी रेलवे पुलिस की टीम छिवकी के साथ ही मिर्जापुर और चुनार रेलवे स्टेशन से ट्रेन में चढ़ने वालों की जानकारी जुटा रही है। जांच टीम का मानना है कि ऐसे टाइमर बम बनाने में नक्सली माहिर हैं। ऐसे में ज्यादा संभावना है कि नक्सल प्रभावित चुनार या मिर्जापुर स्टेशन से चढ़कर किसी नक्सली ने ऐसा किया हो। हालांकि, बम प्लांट करने वाले शख्स का पता लगाने में जांच टीम को नाकों चने चबाने पड़ सकते हैं। पता चला है कि जांच टीम ने चुनार स्टेशन पर जाकर छानबीन शुरू कर दी है।
वाराणसी से मुंबई जाने वाली महानगरी एक्सप्रेस में तीन रोज पहले मानिकपुर स्टेशन पहुंचने पर स्लीपर कोच के टायलेट में टाइम बम मिलने से सुरक्षा एजेंसियों में खलबली मची है। यह बम तकनीकी खामी की वजह से नहीं फट सका वरना जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था। ट्रेन से हटाए गए बम को इलाहाबाद की बीडीएस टीम ने मानिकपुर के जंगल में विस्फोट कराकर निष्क्रिय किया था। बम में टाइमर के साथ दस जिलेटिन छड़े लगीं थीं, जिससे धमाका होने पर ट्रेन की दो-तीन बोगी को नुकसान पहुंचता। टाइमर और जिलेटिन छड़ों का इस्तेमाल कर ऐसे बम बनाने में नक्सलियों को महारत हासिल है।
महानगरी एक्सप्रेस वाराणसी से चलकर काशी, चुनार, मिर्जापुर, विंध्याचल, छिवकी स्टेशन होते हुए मानिकपुर स्टेशन पहुंचती है। मानिकपुर जीआरपी में एफआईआर लिखकर जांच की जा रही है। दिल्ली से एनआईए की टीम ने भी आकर बम के अवशेष कब्जे में लिए। इधर, जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि महानगरी एक्सप्रेस में बम किसने रखा? वह किस स्टेशन से ट्रेन में चढ़ा? इस लिहाज से जांच टीम ने छिवकी, मिर्जापुर, चुनार स्टेशन को अहम माना है। नक्सलियों की करतूत होने की संभावना है, इसलिए नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के नाते चुनार रेलवे स्टेशन जांच के दायरे में है। छिवकी, चुनार, मिर्जापुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन में चढ़ने वाले यात्रियों का रिकार्ड हासिल कर उनके बारे में पता लगाया जा रहा है।
जांच टीम को आशंका है कि बम रखने वाले ने ट्रेन में सफर नहीं किया होगा, बल्कि ट्रेन के टायलेट में बम रखकर उसी स्टेशन पर उतर गया होगा। ऐसे में उसने टिकट भी नहीं लिया होगा। यूं उसके बारे में पता लगाना मुश्किल होगा। मानिकपुर जीआरपी थाना प्रभारी जयप्रकाश का भी अनुमान है कि चुनार या मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर ही ट्रेन में बम प्लांट किया गया होगा। उन्होंने बताया कि यात्रियों की हत्या की कोशिश, राष्ट्र विरोधी गतिविधि समेत विभिन्न धाराओं में दर्ज केस की विवेचना उपनिरीक्षक कुंवर बहादुर को सौंपी गई है।
रेलवे स्टेशनों पर कई बार आतंकी हमले की वजह से सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां बार-बार रेलवे स्टेशनों पर सतर्कता बढ़ाने का अलर्ट जारी करती हैं। सुरक्षा इंतजाम भी करने की हिदायत दी जाती है, मगर महानगरी एक्सप्रेस में बम रखने के मामले में रेलवे प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। आशंका है कि बम छिवकी या नक्सल प्रभावित चुनार स्टेशन से ट्रेन के टायलेट में रखा गया होगा, लेकिन इन दोनों ही स्टेशन परिसर में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं।
कैमरे लगे होते तो सीसीटीवी फुटेज के जरिए बम प्लांट करने वाले अपराधी को चिह्नित किया जा सकता था, लेकिन अब जांच टीम लाचार है। छिवकी रेलवे जीआरपी प्रभारी अरविंद जायसवाल ने बताया कि कुंभ और पिछले माघ मेला में रेलवे की तरफ से कैमरे लगाए गए थे, जो बाद में निकाल लिए गए। इस बारे तो माघ मेले में कैमरा नहीं लगाया, जबकि एसपी जीआरपी ने पत्र भी लिखा था।
जनता सीधे पुलिस अधिकारियों को फोनकर मदद मांग सके या कोई जानकारी दे सके इसीलिए शासन ने दरोगाओं से लेकर डीजीपी तक को सीयूजी नंबर उपलब्ध कराया है, मगर शासन की इस मंशा को पुलिस अधिकारी और कर्मचारी पूरी नहीं होने दे रहे हैं। आलम यह है कि आईजी स्तर के अधिकारी भी बार-बार फोन करने पर कॉल नहीं रिसीव करते। आईजी रेलवे आशुतोष पांडेय को तीन रोज में सात बार अमर उजाला संवाददाता ने फोन लगाया, लेकिन उन्होंने एक बार भी नहीं रिसीव किया। अब यह आईजी ही जानें कि वह किस मीटिंग में व्यस्त थे।