फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

न्यायमूर्ति टंडन का मिला पत्र, जांच पर करेंगे विचार

Sun, 23 Sep 2018 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
Allahabad University Vice Chancellor, Hanglu - फोटो : FILE PHOTO
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति अरुण टंडन को इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) प्रशासन की ओर से जारी पत्र मिल गया है लेकिन न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने अब तक जांच को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। उनका कहना है कि इस पर बाद में विचार करेंगे। वहीं, इविवि प्रशासन की ओर से केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजी गई उस रिपोर्ट पर छात्रों ने सवाल उठाए हैं, जिसमें कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू को पाकसाफ बताया गया है।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने बताया कि कुलपति के मामले में जांच के लिए इविवि प्रशासन की ओर से भेजा गया पत्र उन्हें मिल गया है। वह रविवार को लखनऊ जा रहे हैं। सोमवार तक लौटेंगे और मंगलवार को विचार करेंगे कि जांच करें या नहीं। यानी 25 सितंबर तक तय हो सकेगा कि न्यायमूर्ति टंडन बतौर जांच कमेटी के अध्यक्ष जांच के लिए तैयार होंगे या नहीं। फिलहाल इविवि प्रशासन की ओर से 24 सितंबर से ही जांच शुरू कराने निर्णय लिया जा चुका है और पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार सिंह की ओर से विज्ञप्ति जारी कर कहा गया है कि व्हाट्स एप चैट और कॉल रिकार्डिंग का ऑडियो वायरल होने के मामले में किसी को साक्ष्य देना है तो वह 24 से 26 सितंबर तक  इविवि के अतिथि ग़ृह में जांच कमेटी के नोडल अधिकारी देवेश गोस्वामी को साक्ष्य उपलब्ध करा सकते हैं।

उधर, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह और रोहित मिश्र ने इविवि प्रशासन की ओर से केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। ऋचा सिंह का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार गलत सूचनाएं देकर छात्रों समेत मंत्रालय को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। एक तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन अपने मन से कमेटी गठित करता है, जो सवालों के घेरे में है। वहीं, इविवि प्रशासन अपनी तरफ से एक रिपोर्ट तैयार कर मंत्रालय को भेज देता है, जो इविवि प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करती है। एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री एवं पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र का कहना है कि इविवि प्रशासन की ओर से मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट पूरी तरह से मनगढ़ंत प्रतीत होती है।
विज्ञापन


ऑटा के पूर्व पदाधिकारियों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के खिलाफ विजिटर यानी राष्ट्रपति को जो खुला पत्र लिखा है, उसमें अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त शामिल है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को लगातार भेजी जा रहीं शिकायतों के बावजूद अब तक कुलपति के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई न होने और उच्च शिक्षा के नियामकों की चुप्पी पर भी पूर्व पदाधिकारियों ने सवाल उठाए हैं और संक्रमण काल से गुजर रहे इविवि की हालत पर चिंता जताई है। पूर्व पदाधिकारियों ने अपने पत्र में प्रो. गौतम देसी राजू की अध्यक्षता में गठित यूजीसी की कमेटी की ओर से कुलपति की कार्यप्रणाली को लेकर की गई गंभीर टिप्पणियों का जिक्र किया है। पूर्व पदाधिकारियों ने पत्र में कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि इस रिपोर्ट को टंडे बस्ते में डाल दिया गया है। उन्होंने मांग की है इस मामले में सीधे विजिटर को जांच का आदेश जारी करना चाहिए और कुलपति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए ताकि कुलपति की कारगुजरियों के कारण संक्रमण के दौर से गुरज रहे इविवि को गंभीर संकट से मुक्ति मिल सके।

- इविवि एवं संघटक कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती में स्क्रीनिंग, शॉर्ट लिस्टिंग, विशेशज्ञों के चयन, अकादमिक क्षमता और शोध संबंधी आकलन में की गई व्यापक अनियमितता एवं पक्षपात पूर्ण चयन।
- अधिनियम, परिनियम एवं यूजीसी के रैगुलेशन में वर्णिज प्रावधानों का व्यापक उल्लंघन, जिनके कारण बड़ी संख्या में उच्च न्यायालय में याचिकाएं दाखिल हुईं। कुलपति को कई बार न्यायालय की अवमानना का आरोप झेलना पड़ा और एक बार तो न्यायालय के आदेश पर कुलपति एवं कुलसचिव के वेतन पर भी रोक लगा दी गई।
- इविवि की मान्य प्राधिकारी संस्थाओं की सतत अवहेलना एवं इनकी सदस्यता में मनमाने फेरदबल करके मानचाहे निर्णय लेना और इस प्रकार इविवि को ऐसे टापू के रूप में बदल देना जहां कानून का राज न चलता हो।
- इविवि कीप्रवेश परीक्षाओं एवं अन्य परीक्षाओं में व्यापक अनियमितताएं।
- प्रशसनिक निर्णयों में मनमानी एवं नियमानुसार चुने गए अथवा नामित अधिकारियों को भ्रामक तथ्यों के आधार पर पदमुक्त करना। वरिष्ठता सूची में मनचाहा परिवर्तन कर देना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत की सतत अवहेलना।
- इविवि के अध्यापकों एवं अधिकारियों के विरुद्ध आधिकारिक बैठकों में अपमानजनक टिप्पणियां करना।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) का स्थापना दिवस रविवार 23 सितंबर को मनाया जाएगा। रविवार को सुबह 11 बजे सीनेट हाल में स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया जाएगा। हालांकि इसमें कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू शामिल नहीं होंगे। वहीं, छात्रों ने निर्णय लिया है कि वे काला कपड़ा पहनकर समारोह में शामिल होंगे और सांकेतिक रूप से कुलपति के प्रति अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
इविवि के स्थापना दिवस की जोरशोर से तैयारियां की जा रहीं थी लेकिन इस बीच कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू विवादों में घिर गए और छात्रों का विरोध बढ़ने पर वह छुट्टी पर चले गए। पहले उन्हें ही कार्यक्रम कमी अध्यक्षता करनी थी। इविवि के पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार सिंह के अनुसार कार्यक्रम की अध्यक्षता अब विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. केएस मिश्र करेंगे। उधर, छात्र संघर्ष मोर्चा और वर्तमान छात्रसंघ के पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी छात्र काला वस्त्र धारण कर कार्यक्रम में शामिल होंगे। छात्रों ने कहा कि अंहिसात्मक तरीके से उनका आंदोलन जारी रहेगा। कार्यक्रम तब तक शांतिपूर्ण रहेगा, जब तक वहां कुलपति प्रो. हांगलू का प्रवेश न हो।

इविवि के कुलपति के विरोध में सोमवार, 24 सितंबर को सिविल लाइंस के सुभाष चौराहे पर बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन होने जा रहे है। इसमें छात्रों के साथ महिला संगठनों, कर्मचारियों संगठनों के लोग शामिल होंगे। अधिवक्ता भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे। एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री एवं इविवि छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष रोहित मिश्र का कहना है कि आंदोलन को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित संगठनों से समर्थन मांगा गया है। शनिवार को विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में कैंपेन चलाया गया। डेलीगेसियों में भी बड़ी संख्या में छात्रों का समर्थन मिल रहा है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भले ही शिक्षक कुलपति का विरोध कर रहे हों लेकिन कॉलेजों के 300 शिक्षकों ने कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के समर्थन में अपने हस्ताक्षर किए हैं। शिक्षकों के हस्ताक्षर वाला यह पत्र केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजा गया है। हस्ताक्षर अभियान में राजर्षि टंडन महिला महाविद्यालय, ईश्वर शरण पीजी कॉलेज, एसएस खन्ना महिला महाविद्यालय, सीएमपी डिग्री कॉलेज, आर्य कन्या महिला महाविद्यालय और श्याम प्रसाद मुखर्जी कॉलेज के शिक्षकों ने भाग लिया। इन शिक्षकों ने कुलपति के समक्ष अपना समर्थन व्यक्त किया है। उधर, ऑक्टा के महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह का कहना है कि कुलपति ने जब से विश्वविद्यालय में ज्वाइन किया है, तब से उनके खिलाफ कुछ लोग षड़यंत्र कर रहे हैं और यह दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं, ऑक्टा के अध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि राष्ट्रपति को पत्र लिखने वाले वही लोग हैं, जिनके लोगों को विश्वविद्यालय में शिक्षक भर्ती में चयन नहीं हो सका। ऐसे लोग सिर्फ राजनीति कर रहेक है और महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर की कक्षाओं के संचालन और शिक्षकों की पदोन्नति का विरोध कर रहे हैं।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें