इलाहाबाद। गंगापार के नवाबगंज इलाके में हथियार बंद शिकारियों ने खुलेआम एक तेंदुए को मार गिराया और उसका शव भी गायब कर दिया। तेंदुए को मारने के बाद उसकी लाश के साथ फोटो भी खिंचवाई गई। दुर्लभ प्रजाति के जानवर के साथ घंटों यह खेल जारी रहा और जब तेंदुए का शव वहां से हटा दिया गया तो वन विभाग की टीम मौके पर जांच करने पहुंची। लापरवाही उजागर होने के बाद विभाग के अफसर अब मामले की लीपापोती में लगे हुए हैं।
उन्होंने संवेदनशीलता की सारी हदों को तोड़ते हुए मारे गए जानवर को तेंदुआ मानने से ही इनकार कर दिया है। तेंदुए की फोटो देखने के बावजूद अफसर उसके फिशिंग कैट या जंगली बिल्ली होने की संभावना जता रहे हैं, जो हास्यास्पद है। फिलहाल खानापूरी करते हुए वन विभाग की टीम ने मौके पर मिले तेंदुए के बाल एवं खून को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है और नवाबगंज थाने में वन्य जीव संरक्षण की विभिन्न धाराओं के तहत अज्ञात शिकारियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा दिया है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेंदुए की खाल की कीमत हजारों डॉलर लगाई जाती है। तेंदुए को मारने वाले भी यह बात अच्छी तरह से जानते थे और इसी वजह से तेंदुए को मारने के बाद उसका शव गायब कर दिया गया। हालांकि नवाबगंज क्षेत्र में गंगा के कछार में स्थित मूसेपुर गांव में तेंदुए ने भी हमला कर दो ग्रामीणों को घायल कर दिया लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि तेंदुए की हत्या आत्मरक्षा में की गई तो मारने के बाद उसका शव गायब क्यों किया। वन विभाग की टीम को मौके पर पहुंचने में इतना समय क्यों लगा। फिलहाल अफसरों के पास इसका कोई जवाब नहीं।
इस घटना के पीछे अब कहानी बताई जा रही है कि शिकारियों ने तेंदुए को मारकर उसका शव दफना दिया था और जब वन विभाग की टीम ने खोजबीन शुरू की तो शव निकालकर अज्ञात स्थान में छिपा दिया गया। मामला गंभीर होता देख वन विभाग के अफसर अब पूरे मामले से पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं। डीएफओ मनोज खरे के मुताबिक उनके निर्देश पर रेंजर एसएन श्रीवास्तव की अगुवाई में सात सदस्यीय टीम ने इलाके का भ्रमण कर छानबीन की। जांच के दौरान टीम को तेंदुए का शव तो नहीं मिला लेकिन मौके से खून के धब्बे और बाल मिले, जिसके नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए। उनके मुताबिक जांच टीम अभी इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है कि मृत जानवर तेंदुआ ही है। इसकी पुष्टि के लिए टीम ने हमले में घायल दोनों ग्रामीणों से भी पूछताछ की है।
तेंदुए के हमले में दो ग्रामीणों के घायल होने के बाद क्षेत्र के मूसेपुर, तैयापुर, टिकरी व बुदौना जैसे गांवों के दहशत का माहौल है। ग्रामीणों के दावों पर यकीन करें तो इलाके में तीन तेंदुए देखे गए हैं। ग्रामीणों को इस बात का भय सता रहा है कि न जाने कब और कहां तेंदुआ उन पर हमला बोल दे। दहशत के कारण ग्रामीण एवं महिलाएं जंगल की तरफ जाने से कतरा रहे हैं। घटना के बाद कई ग्रामीण एकजुट होकर रात भर पहरेदारी भी कर रहे हैं।
‘विभागीय जांच में मारे गए जानवर के ‘फिशिंग कैट’ या जंगली बिल्ली होने की संभावना लग रही है। जब तक शव न बरामद हो, यह कैसे कहा जा सकता है कि मृत जानकर तेंदुआ था। घायल ग्रामीणों ने भी जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक जंगली बिल्ली हो सकती है। फिर भी मुकदमा दर्ज कर तमाम पहलुओं की जांच की जा रही है।’
00 मनोज खरे, डीएफओ