राजा शंकरगढ़ की जमीन का नकली वसीयतनामा तैयार कर फर्जी तरीके से मसुरियन माई मेले की 22 बीघा जमीन बेचे जाने का मामला सामने आया है। मामले में बारा तहसील प्रशासन ने जमीन के क्रय, विक्रय और वहां किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगा दी है। साथ ही संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर 15 दिनों में जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई तहसीलदार बारा के न्यायालय में चल रही है।
तथ्यों के मुताबिक शंकरगढ़ के राजा कमलाकर सिंह के दो पुत्र ज्ञानेंद्र सिंह और महेंद्र सिंह थे। ज्ञानेंद्र की कोई संतान नहीं थी। बाद में उनकी मौत हो गई। महेंद्र के एक पुत्र शिवेंद्र सिंह और बड़ी पुत्री अपर्णा हैं। कई दिनों पहले थाना दिवस और तहसील दिवस में शिकायत पहुंची कि अशोक नगर में हेस्टिंग रोड निवासी अपर्णा एवं शिवेंद्र ने नकली वसीयतनामा तैयार कर राजा शंकरगढ़ की जमीन दूसरे को बेच दी है। तहसीलदार बारा रामकुमार शुक्ला ने मामले की जांच कराई तो पता चला कि फर्जी वसीयत तैयार कर अपर्णा सिंह के नाम मसुरियन माई मेले की 22 बीघा जमीन कर दी गई। अपर्णा ने यह जमीन अपने भाई शिवेंद्र सिंह के नाम कर दी जबकि नियमत: अपर्णा जीवित रहते वसीयत अपने भाई के नाम नहीं कर सकती हैं।
बाद में यह जमीन किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दी गई और वहां निर्माण शुरू करा दिया गया। लोगों ने इसका विरोध किया। शिकायत तहसील दिवस और थाना दिवस में पहुंची। कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका में जांच कराई गई और अब फर्जीवाड़ा सामने आने पर तहसीलदार ने जमीन के क्रय, विक्रय एवं किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगा दी है। अपर्णा, शिवेंद्र को नोटिस जारी कर पक्ष रखने के लिए कहा गया है। सूत्रों का कहना है कि जमीन नियमत: सीलिंग की है और उस पर राज्य सरकार का कब्जा होना चाहिए। इसी से बचने के लिए फर्जीवाड़ा किया गया।