कानपुर के पुखरायां रेल हादसे के पीछे पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई की भूमिका के बारे में अहम सुराग सामने आने के बाद रेल महकमे में हड़कंप मच गया है। बिहार के पश्चिम चंपारण के एसपी के इस खुलासे के बाद बीते कुछ सालों में हुई प्रमुख रेल दुर्घटनाओं को भी अब इससे जोड़कर देखा जा सकता है। इसमें मुख्य रूप से फतेहपुर के निकट वर्ष 2011 में कालका मेल और उसके बाद वर्ष 2015 में मुरी एक्सप्रेस हादसा शामिल है। दरअसल ये दोनों ही हादसे रेल पटरी टूटने की वजह से हुए, जैसा कि पिछले साल 20 नवंबर को पुखरायां में हुआ था।
बीते साल कानपुर के निकट पुखरायां में इंदौर से पटना जा रही ट्रेन के 20 नवंबर की तड़के कई डिब्बे पटरी से उतर गए थे। इस हादसे में 152 यात्रियों की जहां मौत हुई थी तो 300 से ज्यादा यात्री घायल हुए थे। मंगलवार को बिहार के पश्चिम चंपारण के एसपी द्वारा इस मामले में आईएसआई के कनेक्शन होने की बात कहने के बाद तमाम खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। उत्तर मध्य रेलवे जोन (एनसीआर) में बीते कुछ वर्षों के दौरान हुई घटनाओं को भी खंगालने की चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल एनसीआर जोन में दस जुलाई 2011 को कालका मेल मलबा के पास पटरी से उतर गई थी। तब इस हादसे में 72 यात्रियों की मौत हुई थी, जबकि घायल होने वाले यात्रियों की संख्या 150 के आसपास रही। यहां जांच के बाद ट्रैक टूटे होने की बात सामने आई थी।
इसी तरह की एक अन्य घटना 25 मई 2015 को मुरी एक्सप्रेस के कौशाम्बी जिले के सिराथू एवं अथसराय रेलवे स्टेशन के बीच हुई। इस हादसे में तीन यात्रियों की मौत होने के साथ 100 से ज्यादा यात्री घायल हुए। मुरी हादसे के कुछ दिन पूर्व संबंधित घटना स्थल के कुछ मीटर पहले ट्रैक किनारे मिले जैक से हड़कंप मच गया था। इन घटनाओं के अलावा अभी हाल ही में रूरा में सियालदाह-अजमेर और कानपुर के निकट ही लखनऊ रूट पर एक मालगाड़ी के पटरी से उतरने का भी मामला सामने आया। हालांकि इन दोनों घटनाओं में किसी की मौत तो नहीं हुई, लेकिन यात्री जरूर काफी संख्या में घायल हो गए।
इन सभी घटनाओं में ट्रैक टूटने का ही मामला सामने आया जैसा की पुखरायां में हुआ। पुखरायां मामले में आईएसआई का नाम सामने आने के बाद पूर्व में हुई इन घटनाओं को दुबारा खंगालने की संभावना है।
‘इस बारे में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता। पुलिस और खुफिया एजेंसी अपना काम कर रही है। ये बात सही है कि कालका और मुरी हादसे रेल पटरी टूटने की वजह से हुए थे। ’
- बिजय कुमार, सीपीआरओ, एनसीआर।