दो दिन पहले कचरी गांव में अचानक दो किसानों की गिरफ्तारी हुई और अब नया मामला सामने आया है कि पूर्व में कचरी आंदोलन में शामिल रहा एक अन्य किसान दो दिन से लापता है। परिजनों का आरोप है कि किसान को पुलिस वाले उठाकर ले गए हैं। इस पावर प्लांट से प्रभावित कचरी सहित सभी आठ गांवा के इंट्री प्वांइट पर पुलिस का पहरा बढ़ा दिया गया है और गांव में आने-जाने वालों पर पैनी नजर रखी जा रही है। हालांकि ग्रामीणों में अब तक पावर प्लांट के विरोध में कोई बयान नहीं दिया है लेकिन प्रशासन और पुलिस की सख्ती की वजह से उनका गुस्सा भड़कने लगा है।
कचरी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले किसान नेता लक्ष्मी नारायण यादव दो दिन से लापता हैं। वह देहली भगेसर गांव में रहते हैं। उनका बेटा हेमंत यादव जीआईसी में कक्षा 11 का छात्र है। हेमंत ने बताया कि कुछ लोग दो दिन पहले घर आए और खुद को पुलिस वाला बताकर उसके पिता को साथ ले गए। घर वाले परेशान हैं। प्रशासन और पुलिस के अफसरों से बात की गई लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
कोई बताने वाला नहीं हैं कि उसके पिता कहां हैं। वहीं, कचरी से दो दिन पहले गिरफ्तार किए गए किसान संतोष की पत्नी नीलम और किसान राजेंद्र की मां रामकली का कहना है कि पुलिस उनके पति और बेटे को कहां ले गई और उनके साथ क्या हुआ, इस बारे में कोई बताने को तैयार नहीं है। दोनों किसानों के परिजन अब तक उनका चेहरा नहीं देख सके हैं और किसी अनहोनी की आशंका से सहमे हुए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद से कचरी एवं आसपास के गांवों में माहौल और बिगड़ गया है। गांवों के इंट्री प्वाइंट पर जिस तरह से सख्ती के बाद स्थानीय ग्रामीणों को आने-जाने की अनुमति दी जा रही है, इससे ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। दूसरी ओर निर्माण स्थल पर चहारदीवारी बनाए जाने के लिए खड़ी और हरी फसल पर बुल्डोजर चलाए जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
करछना थाना क्षेत्र के पिपरांव गांव में गत 27 फरवरी को 40 वर्षीय किसान कमलेश भारतीय ने खुद को आग लगाकर जाने दे दी थी। कमलेश की मौत के बाद चर्चा होने लगी थी कि भविष्य में पिपरांव गांव की जमीन का भी पावर प्लांट के लिए अधिग्रहण होना है। कहीं इसी चिंता में तो कमलेश ने अपनी जान नहीं दे दी। फिलहाल डीएम संजय कुमार ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश जारी कर दिए हैं और एसडीएम करछना एसपी श्रीवास्तव को जांच अधिकारी नामित किया है। एसडीएम करछना के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को इस घटना के बारे में जानकारी है तो वह 10 मार्च को सुबह 10 बजे से अपराह्न तीन बजे के बीच उनके न्यायालय में उपस्थित होकर अपनी बयान दर्ज करा सकता है या साक्ष्य प्रस्तुत कर सकता है।
सख्ती से कचरी और आसपास के गांवों में विरोध की चिंगरी सुलगने लगी तो प्रशासन ने अब किसानों पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। मंगलवार को डीएम संजय कुमार ने प्रभावित आठ गांवों के लोगों के साथ चौपाल लगाई और बताया कि गांवों के विकास के बारे में विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। गांवों विकास लोहिया ग्राम विकास योजना की तर्ज पर किया जाएगा। उन्होंने एसडीएम करछना को निर्देश दिए कि जिन किसानों को मुआवजा राशि नहीं मिली है, 31 मार्च तक विशेष शिविर लगाकर उन्हें मुआवजा दे दिया जाए।