अपने ऐतिहासिकता के लिए जाना जाने वाली झूंसी इलाका पिछले एक दशक के भीतर कीमती जमीन के कारोबार के चलते खूनी जंग का मैदान बन चुका है। पिछले एक दशक के दौरान इलाके में कई बार गैंगवार भी हो चुके हैं। इन घटनाओं में नौ लोगों का कत्ल हो चुका है। रविवार को नैनी जेल गेट पर ज्ञानचंद्र समेत दो लोगों की हत्या के पीछे दुश्मनी के साथ ही जमीन के धंधे में अदावत रही है।
तकरीबन 11 साल झूंसी के छतनाग गांव निवासी समाजवादी पार्टी के नेता मोहनलाल यादव उर्फ मुनीम का जून 2005 में कत्ल जमीन के धंधे में दबदबा बनाने की खातिर ही किया गया था। हत्या के विरोध में कई रोज तक बवाल हुआ। कुछ ही दिनों बाद मुनीम यादव के विरोधी गणेश यादव पर जीटी रोड स्थित उनकी मार्केट के सामने ऑटोमेटिक हथियारों से जानलेवा हमला किया गया था। हालांकि गणेश हमले में साफ बच गए लेकिन दो लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद प्रापर्टी डीलिंग में वर्चस्व के लिए कई गिरोहों और सफेदपोशों के बीच टकराव होने लगा।
वर्ष 2005 में ही शेरडीह ग्रामसभा के प्रधान योगेंद्र यादव उर्फ बच्चा को स्कूल में वजीफा बांटते समय गोली-बम मारकर मौत के घाट उतार दिया गया था। उस वारदात के पीछे भी कीमती जमीन का झगड़ा था। बच्चा के कत्ल में पूर्व प्रधान चंद्रभान यादव और उसके चारा बेटे आरोपी बनाए गए थे। सभी को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया। फिर 2008 में बच्चा यादव के छोटे भाई धर्मेंद्र की भी रहिमापुर तिराहे पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसमें भी पूर्व प्रधान चंद्रभान और उसके बेटे पर हत्या का केस दर्ज किया गया। जमीन के ही धंधे में पनपी रंजिश के चलते 2009 में पुरानी झूंसी के सकलैन को मार डाला गया। सकलैन का इलाके में खासा दबदबा था।
तकरीबन दो साल पहले झूंसी का छतनाग गांव भी करोड़ों की जमीन पर कब्जे के झगड़े में गोली और बम के धमाकों से थर्रा उठा। इसमें हरिश्चंद्र भारतीया समेत दो लोगों को जान गंवानी पड़ी। उस घटना में सगे भाई छोट्टन गिरि और बब्लू गिरि अब भी जेल में बंद हैं। रविवार दोपहर बाद नैनी जेल गेट के पास पिता चंद्रभान से मिलकर निकले ज्ञानचंद्र समेत दो लोगों की सफारी कार के भीतर गोलियां मारकर कत्ल के पीछे एक दशक पुरानी दुश्मनी के साथ ही जमीन के कारोबार में अदावत भी रही है। पता चल रहा है कि एक सफेदपोश ने रंजिश का फायदा उठाकर अपना हित साध लिया। उसने ही शूटरों की व्यवस्था की। हालांकि अभी पुलिस कुछ भी नहीं बोल रही है।
पिछले एक दशक के दौरान झूंसी में जमीन के कारोबार ने बेहद तेजी से पांव पसार लिया है। हालत यह है कि झूंसी के हर गांव में दो-चार प्रापर्टी डीलर मिल जाएंगे। प्लाटिंग का कारोबार तेज रफ्तार से बढ़ने के साथ ही दुश्मनी के चलते भू-माफियाओं में टकराव भी बढ़ा है। किसानों से कुछ लाख रुपये बीघा पर खरीदी जमीन को वर्ग गज में बेचकर जमीन माफिया करोड़ों रुपये का मुनाफा कूट रहे हैं। झूंसी के जीटी रोड से रहिमापुर मार्ग पर स्थित एक दर्जन गांव, कछारी गांव बदरा, सोनौटी से लेकर हेतापट्टी तक, लीलापुर मार्ग पर चमनगंज से लेकर ककरा-कोटवां गांव तक काश्तकारों से सस्ते दर में जमीन खरीदकर करोड़ों रुपये कमाने के चक्कर में जमीन का कारोबार खूनी होता गया है।