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हॉस्पिटल के 50 से ज्यादा कर्मचारियों से की पूछताछ

Mon, 16 Jan 2017 01:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
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जीवन ज्योति हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. एके बंसल हत्याकांड की जांच में जुटी एसटीएफ और क्राइम ब्रांच के साथ ही कीडगंज पुलिस ने रविवार को कई घंटे में हॉस्पिटल के 50 से ज्यादा कर्मचारियों और सिक्योरिटी गार्ड्स के बयान दर्ज किए। जांच टीमों ने उनसे अलग-अलग पूछताछ की ताकि कुछ सुराग मिल सके। उनसे यह भी पूछा गया कि पिछले दिनों अस्पताल के भीतर डॉक्टर के साथ किसी व्यक्ति की झड़प या ऐसी कोई और घटना तो नहीं हुई?
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घटना के तीन रोज गुजरने के बाद भी अब तक कोई क्लू नहीं मिलने से परेशान क्राइम ब्रांच, एसटीएफ और पुलिस ने अस्पताल कर्मियों को खंगालना शुरू किया है। शनिवार को दोपहर से लेकर शाम तक कीडगंज थाना प्रभारी मनोज त्यागी और क्राइम ब्रांच के सब इंस्पेक्टर ने 50 से ज्यादा कर्मचारियों के साथ ही सिक्योरिटी गार्ड्स से अलग-अलग बात की। उनके बयान दर्ज किए। डॉ. बंसल के ओपीडी चैंबर, रिशेप्शन समेत आसपास के कार्यालय में तैनात रहे कर्मचारियों को बुलाकर सवाल-जवाब किए गए। साथ ही मेन गेट और पिछले गेट पर तैनात रहे सुरक्षाकर्मियों से भी पूछताछ की गई। रिशेप्शन पर रहने वाली महिला कर्मियों से भी बात की गई। उन सभी से पूछा गया कि पिछले दिनों अस्पताल में आए मरीजों के घरवालों या किसी अन्य शख्स से डॉ.बंसल की झड़प या कहासुनी तो नहीं हुई थी। अगर झड़प हुई तो वजह क्या थी? करछना में गोलियां लगने से घायल राजा पांडेय के बारे में भी बात की गई, जिसके बारे में चर्चा है कि उसने पैसों के लिए बदसलूकी की वजह से डॉक्टर को धमकाया था। राजा पांडेय की हालत इतनी खराब है कि उसे शनिवार को एसआरएन अस्पताल से पीजीआई रेफर कर दिया गया।

कुछ कर्मचारियों पर अब की जा सकती है सख्ती
 हत्याकांड में एक अदद सुराग के लिए भटक रही जांच टीम को जीवन ज्योति हॉस्पिटल के दो-तीन कर्मचारियों का रवैया अखर रहा है और वे संदिग्ध भी हो गए हैं। घटना के वक्त चैंबर में डॉ. बंसल के साथ मौजूद रहे कम्पाउंडर शैलेंद्र पाठक, स्वदेश और प्रशांत ने पूछताछ में एसटीएफ और क्राइम ब्रांच को कुछ भी खास नहीं बताया। शैलेंद्र पाठक के ठीक सामने शूटर ने डॉक्टर को गोलियां मारी थीं लेकिन वह इतना ही कहता है कि डॉक्टर पर एक गोली चलाने के बाद शूटर ने उसकी तरफ पिस्टल तानी थी। घबराकर वह अपने सिर पर हाथ रखकर नीचे बैठ गया। इसके बाद वह कुछ नहीं देख सका था। गोलियां बरसाकर शूटर के भागने के बाद वह चीखते हुए बाहर निकल गया था। प्रशांत और स्वदेश के भी बयान से एसटीएफ और क्राइम ब्रांच को कातिलों के बारे में कोई क्लू नहीं मिल सका है।
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इनमें भी शैलेंद्र का बयान जांच टीम को ज्यादा ही अखर रहा है। उसने शूटर को एकदम करीब से देखा लेकिन कह रहा है कि उसे कुछ ध्यान नहीं है। वह यह तक नहीं बता रहा कि शूटर ने सिर पर मफलर या गमछा बांधा था। सीसीटीवी फुटेज में शूटर के सिर पर मफलर दिखा है और दूसरे चश्मदीदों ने भी यही बताया है। इसकी बजाय वह बात का रुख मोड़ते हुए कहने लगता है कि उसका मोबाइल फोन चोरी हो गया है। अब उसे हिरासत में लेकर नए सिरे से पूछताछ करने का फैसला किया गया है। शैलेंद्र समेत दूसरे दो-तीन कर्मचारियों के मोबाइल फोन की कॉल डीटेल हासिल करने के साथ ही सर्विलांस का भी सहारा लिया जा रहा है। पुलिस को पहले दिन से इस बात की आशंका है कि डॉ.बंसल हत्याकांड में अस्पताल के किसी कर्मचारी ने मुखबिरी की है। वह कौन है? इस बारे में छानबीन की जा रही है।
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