जिला न्यायालय ने शुआट्स प्रकरण में पूर्व सांसद अतीक अहमद को जमानत देने से इंकार करते हुए उनकी अर्जी नामंजूर कर दी है। अतीक की जमानत पर जिला जज एसके पचौरी ने सुनवाई की। जिला शासकीय अधिवक्ता राम अभिलाष सिंह ने जमानत का विरोध करते हुए बताया कि अतीक के खिलाफ कई संगीन आपराधिक मुकदमे हैं। घटना 14 दिसंबर 2016 की है। शुआट्स के पीआरओ डॉ. रमाकांत दुबे ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
आरोप है कि अतीक अहमद छह गाड़ियों में 50-60 लोगों को लेकर संस्थान में आए थे। प्रशासनिक भवन स्थित निदेशक के कमरे में घुस कर बैठ गए। उनके साथ आए लोगों ने कार्यालय कर्मचारी सुधेंधु उपाध्याय और गोविंद प्रजापति को मार पीट कर चोटें पहुंचाईं। तोड़फोड़ की गई। सुरक्षा अधिकारी को मारापीटा गया। इसके बाद सभी डेयरी विभाग गए और वहां तेजस जैकब को घसीट कर मारा-पीटा। यह भी आरोप है कि सांसद दो छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को वापस लेने का दबाव बनाने गए थे।
डीजीसी ने जमानत का विरोध करते हुए अतीक अहमद पर 75 आपराधिक मामलों का इतिहास प्रस्तुत किया।
कोर्ट को अभियोेजन ने बताया कि अतीक अहमद के खिलाफ अवर न्यायालय में 19 मुकदमे हैं, जो गवाही, हाजिरी और आरोप तय किए जाने के स्तर पर लंबित हैं। सेशन कोर्ट में हत्या और अपहरण के 12 मुकदमे गवाही में विचाराधीन हैं। अभियोजन की ओर से यह भी तर्क रखा गया कि अतीक अहमद 1989 से 2017 तक लगातार अपराध करते चले आ रहे हैं। अभियोजन द्वारा 12 मुकदमों में उनकी जमानत निरस्त कराने की अर्जी दी गई है। कोर्ट ने अतीक अहमद के आपराधिक इतिहास और लगातार अपराधों में उनकी संलिप्ता को देखते हुए जमानत अर्जी नामंजूर कर दी है।