चेक क्लोन कर दूसरे के खातों से पैसे ट्रांसफर करने वाले गिरोह की तमाम कारगुजारियां उजागर हो रही हैं। दो दिन की जांच में ही पुलिस ने दिल्ली में इस गिरोह के 11 और मामले उजागर किए हैं। अब तक की जांच में साफ हुआ है कि इस गिरोह ने पिछले डेढ़ माह में ही 50 लाख से ज्यादा रकम खातों से उड़ा दी है।
दिल्ली में एक मुकदमा दर्ज होने के बाद छानबीन में पहले आकाश और आदर्श दुबे को पकड़ा गया। फिर दिल्ली पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर एसटीएफ ने इलाहाबाद के सोरांव और मऊआइमा से शोएब उर्फ कोसेन, संजय यादव तथा बृजेश को गिरफ्तार किया तो चेक क्लोन कर लोगों के खातों से पैसे ट्रांसफर करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ। इनके कब्जे से बड़ी संख्या में क्लोन चेक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, सिमकार्ड आदि मिले। एसटीएफ के एएसपी अरविंद चतुर्वेदी ने अमर उजाला को बताया कि इस गिरोह ने पिछले करीब आठ साल के दौरान करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा किया है।
इनके खेल को ऐसे समझा जा सकता है कि चेक क्लोनिंग के जरिए इस गिरोह ने महज अक्तूबर और नवंबर के डेढ़ महीने में ही 50 लाख रुपये से ज्यादा ऐंठ लिए। इलाहाबाद के गंगापार इलाकों के दर्जनों लोगों को चूना लगाने के अलावा दिल्ली और हरियाणा में भी इस गिरोह ने ऐसी कारगुजारियां की हैं। गिरोह का आकाश दुबे फर्जी दस्तखत करने और दूसरे चेक की स्कैन कॉपी व्हाट्स एप पर मिलने पर असली जैसा नकली चेक तैयार करने में माहिर है। गिरफ्तारी के बाद दो दिन में ही दिल्ली पुलिस ने इस गिरोह के 11 और कारनामों का पता लगाया गया है। एसटीएफ के एएसपी के मुताबिक, गिरोह के लोगों ने बैकों में क्लोन चेक लगाकर अपने तमाम परिचितों और रिश्तेदारों के खातों में रकम ट्रांसफर की। बृजेश ने अपने खाते में रकम मंगाने के बाद कई दूसरे खातों में पैसे ट्रांसफर किए। इन पैसों से इन लोगों ने आलीशान मकान बनाए और गाड़ियां खरीदीं।
एसटीएफ के एएसपी के मुताबिक, चेक क्लोनिंग के अलावा शोएब ने इलाहाबाद में दूसरे ढंग से भी कई फ्राड कर लोगों को लाखों रुपये की चपत लगाई। इंटरनेट के जरिए की गई धोखाधड़ी के कुछ मामले जानकारी में आए हैं। जल्द ही इसका खुलासा होने पर बड़ी संख्या में पीड़ितों के सामने आने का अनुमान है।