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होलागढ़ एसओ बनारस जेल भेजे, सीओ ने शुरू की जांच

Sun, 09 Jul 2017 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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औचक निरीक्षण का हवाला देकर फर्जी सीआईडी इंस्पेक्टर दुकानदारों से दो हजार रुपये तक ऐंठ रहा था। - फोटो : Demo Pic
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दस हजार की रिश्वत लेने के आरोपी होलागढ़ एसओ पीआर गौरव बनारस जेल भेज दिए गए। सीओ हंडिया और आधा दर्जन पुलिस कर्मियों ने एसओ को  बनारस स्थित भ्रष्टाचार निवारण मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। साथ में साक्ष्य बतौर 10 हजार रुपये की र्श्वित लेने वाले वीडियो फुटेज की सीडी, जांच रिपोर्ट और एफआईआर की कापी अदालत में पेश की । जिनके आधार पर मजिस्ट्रेट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में बनारस जिला कारागार भेज दिया। दूसरी ओर जांच अधिकारी एवं सीओ हंडिया ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने वादी कैलाश चंद्र गुप्ता को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किया जाए, जिसके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
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एसओ होलागढ़ पीआर गौरव को दस हजार रुपये की रिश्वत देने का वीडियो वायरल होने के बाद से पीड़ित कैलाश गुप्ता और उसके ससुर विश्वनाथ रिश्तेदारी में छिप गए थे। सीओ सोरांव ने  शुक्रवार को एसओ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पीड़ित को तलाशा था लेकिन वह नहीं मिला। इस मामले में कार्रवाई के लिए शासन स्तर से भी दबाव बन रहा था। इसी वजह से  सीओ सोरांव डीपी तिवारी ने एसओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई और उनको गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार किए गए एसओ को पहले तो इलाहाबाद पुलिस लाइन में रखा गया। यहां उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे की औपचारिकताएं पूरी की गईं, देर रात उन्हें कैंट थाने ले गए। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मुकदमों की अदालत बनारस में होने की वजह से शनिवार की सुबह सीओ हंडिया उन्हें बनारस ले गए। वहां अदालत में पेश किया गया।
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जांच अधिकारी सीओ हंडिया की ओर से इस मुकदमे की विवेचना शुरू हो गई है। उन्होंने वीडियो फुटेज, एसएसपी को दिए गए शिकायतीपत्र। आरोपी एसओ के बयान तथा एसडीएम का आदेश ले ्लिया है। जिसमें विवादित जमीन को कुर्क करने के आदेश थाना प्रभारी को दिए थे। इसी आदेश पर कार्रवाई करने को एसओ ने मौजा कटरा बनियान मुकंदपुर निवासी कैलाश गुप्ता से दस हजार रुपये की रिश्वत ली थी। यह रकम कैलाश गुप्ता के ससुर विश्वनाथ ने अपने हाथों से दी थी।

 होलागढ़ एसओ की गिरफ्तारी के बाद  पुलिस विभाग में शनिवार को पुरे दिन सन्नाटा रहा। पुुलिस लाइन से लेकर सभी थानों में एसओ की गिरफ्तारी की चर्चाएं रहीं। अधिकांश पुलिस कर्मी इस कार्र्रवाई को आश्चर्य जनक बता रहे हैं। यहां के कई पुराने दीवान और दरोगाओं का कहना है कि उनके कार्यकाल के दौरान यह पहली घटना है कि किसी दरोगा को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया हो। हालांकि कई विभागों के लिपिक और अधिकारी रिश्वत लेने के आरोप में एंटी करेप्शन प्रकोष्ठ ने गिरफ्तार जरूर किए हैं।

होलागढ़ में घूसखोरी का मामला यह पहला नहीं है । दरोगा पूरनमासी राम गौरव के पूर्व 2006 में तत्कालीन बीडीओ पी के पाण्डेय को राकेश जायसवाल ने विकास भवन में रंगे हाथ विजलेन्स टीम से पकड़ाया था। सन 2001 में ग्रामीण बैंक की शाखा होलागढ़ के शाखा प्रबन्धक अशोक कुमार श्रीवास्तव को बैंक के अंदर ही विजलेंस टीम ने रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। सन् 1986 में लाल जी दुबे ने वन विभाग के एक दरोगा को भी रंगे हांथ पकड़ाया था।

एसओ पूरनमासी राम गौरव के जेल जाने के बाद शनिवार को होलागढ़ में दिन भर उनके कारनामे चर्चा ए आम रहे। इस घटना के बाद यहां के जेसीबी मशीन, बालू लदे टैक्टर, टृक व गल्ला व्यापारी राहत में हैं। आरोेप है कि जेसीबी मशीन चलाने के लिए ढ़ाई हजार रूपया प्रतिदिन की सुविधा शुल्क मांगी जाती थी। चर्चा है कि उन्होंने एक रिटायर्ड दरोगा तक को नहीं छोड़ा। उनसे भी मकान बनवाने के दौरान प्रति टृैक्टर बालू का हिसाब भी ले लिया था।
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