रेप पीड़ित बालिका की हत्या से आक्रोशित लोगों ने पुलिस से कहा कि सूरत से उसके पिता को आने दिया जाए तभी अंतिम संस्कार होगा लेकिन पुलिस ने दबाव बनाया कि अंत्येष्टि बुधवार को ही कर दी जाए। पुलिस को आशंका थी कि शव रखा रहा तो बृहस्पतिवार को गांव वाले हंगामा न कर दें।
चीरघर पर पोस्टमार्टम के बाद लोगों और खासतौर से महिलाओं ने पुलिस के विरोध में शव को एंबुलेंस में रखने से रोकने की कोशिश की। कुछ लोगों ने महिलाओं के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पर भी जाकर पुलिस के खिलाफ नारे लगाकर शिकायत की। फिर कई थानों की पुलिस शव को एंबुलेंस में रखकर फाफामऊ पहुंची तो परिजन और रिश्तेदार अड़ गए कि कातिलों की गिरफ्तारी हो और बालिका का पिता सूरत से आए तभी अंतिम संस्कार होगा। पुलिस जबरन शव को फाफामऊ गंगा घाट पर ले गई लेकिन लोग विरोध करते हुए हंगामा करने लगे।
इस पर पुलिस बल ने लाठियां भांजकर लोगों को दौड़ाया। कुछ लोगों को लाठी से पीटा भी। एसपी सिटी राजेश यादव और सीओ कर्नलगंज भी पुलिस बल के साथ पहुंच गए थे। फिर पुलिस ने खुद गड्डा खोदवाया और परिजनों को बुलाकर शव दफन करवाया। मौके पर आए एसडीएम ने परिजनों को भरोसा दिया कि लक्ष्मीबाई फूले योजना के तहत उन्हें साढ़े सात लाख रुपये मुआवजा दिलाया जाएगा। किसी तरह पुलिस ने स्थिति संभाल परिजनों को घर भेजा।
रेप के तेईस रोज बाद पीड़ित बालिका की हत्या के पीछे कुछ और कहानी तो नहीं। हत्या के पीछे कोई और साजिश तो नहीं। गांव वालों में यह चर्चा रही कि पुलिस जांच करे तो घटना में कुछ और किस्सा सामने आ सकता है। एसपी गंगापार राजेश कुमार ने बताया कि हर पहलू पर जांच की जा रही है। परिजनों के आरोप के अलावा पुलिस अपने स्तर से भी घटना के पीछे की सच्चाई खंगाल रही है।