वसंत पंचमी स्नान से एक दिन पहले रविवार दोपहर माघ मेला क्षेत्र में दो शिविरों में आग लगने से पांच टेंट राख हो गए। आग बुझाने के लिए पानी डाले जाने के दौरान शिविर में करंट भी उतर आया। इसके बाद तत्काल शिविर की बिजली काटी गई। मची अफरातफरी के बीच पता चला कि आग में नौ सिलेंडर पड़े हैं। उनमें विस्फोट होने का खतरा था। इससे आसपास के शिविरों में भी हड़कंप मच गया। काफी मशक्कत के बाद सिलेंडरों को बाहर निकाल लिया गया। मौनी बाबा के मुताबिक शार्ट-सर्किट से लगी आग में दक्षिणा के लिए लिफाफे रखे करीब 20 लाख रुपये भी जल गए। इसके अलावा आग से आरती, भंडारे, भोग के लिए रखा सामान राख हो गया। संयोग था कि आग लगने से कुछ देर पहले ही पुणे, कोलकाता समेत अन्य इलाकों से आकर ठहरे श्रद्धालु संगम स्नान के लिए निकल गए थे, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। आग बुझाने के दौरान चार लोग मामूली रूप से जख्मी हुए हैं।
सेक्टर-2 के महाकाल सरस्वती मार्ग के पूर्वी-उत्तरी पटरी पर अमेठी गौरीगंज के मौनी बाबा की दो संस्थाओं के शिविर लगे हैं। दोपहर 1:40 बजे अचानक आग लग गई और पांच टेंट इसकी जद में आ गए। उस समय शिविर में राम मंदिर निर्माण के संकल्प के तहत दीपयज्ञ चल रहा था। सबसे पहले मौनी बाबा के तंबू कक्ष के ऊपरी हिस्से में आग लगी। बताया जा रहा है कि शार्ट सर्किट से चिंगारी उठी। बाबा के शोर मचाने पर शिविर में मौजूद प्रखर मिश्रा, सुरेंद्र शुक्ला, बाबा रामसनेही ने बाल्टी-डिब्बे से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, मगर इससे शिविर में करंट उतर आया। सभी लोग जान बचाकर बाहर भागे। इसी के बाद एक के बाद पांच टेंटों तक आग फैल गई।
मौनी बाबा ने बताया कि परमहंस सेवा आश्रम और मीरा सत्संग आश्रम गौरीगंज के दो शिविरों में शार्ट सर्किट से आग लगी। 23 जनवरी को संत सम्मान समारोह होना था। इसके लिए 11 सौ शाल, गमछे और दक्षिणा के लिए 11 सौ लिफाफे थे, जिसमें 11-11 सौ रुपये रखे हुए थे। करीब 20 लाख की नगदी जली है। इसके अलावा भंडार में रखा अन्न, चांदी की प्रतिमाएं और वस्त्र भी जल गए। बाबा के मुताबिक 27 जनवरी को प्रस्तावित गंगा आरती में ढाई लाख दीप जलाए जाने थे। 28 जनवरी को परिक्रमा निकलने वाली थी। इसकी तैयारी के लिए लाया गया सामान भी जल गया। बाबा ने दक्षिणा के लिए लाखों रुपये नगदी और अन्य सामान जलने का दावा किया है। एसएसपी मेला कवींद्र प्रताप सिंह ने घटनास्थल का जायजा लेने के बाद बताया कि क्षति के आकलन के साथ आग लगने की वजहों की जांच की जा रही है।
आग बड़ा रूप धारण कर सकती थी। मल्लाहों, श्रद्धालुओं और वहां मौजूद पुलिस के जवानों ने तत्परता न दिखाई होती तो एक के बाद एक कई शिविरों तक आग फैल सकती थी। मौनी बाबा के शिविर में आग लगने के बाद पीडब्ल्यूडी ठेकेदार विनोद निषाद ने अपने साथियों के साथ हिम्मत दिखाई। कुछ लोगों की मदद से शिविर में घुसकर उन्होंने आग की लपटों से घिरे नौ सिलेंडरों को बाहर निकलवा दिया।
मौनी बाबा के शिविर में आग किन वजहों से लगी, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। बाबा का कहना है कि आग बिजली के तारों में स्पार्किंग से लगी। जबकि मेलाधिकारी राजीव राय ने बताया कि घटना के वक्त बिजली थी ही नहीं।
मेलाधिकारी का कहना है कि मौनी बाबा के शिविर में सिर्फ रात को12 घंटे ही बिजली दी जाती है। दिन में बिजली होने की बात रिकार्ड में नहीं है। वहां दीप यज्ञ भी चल रहा था। आग किसी और कारण से लगी होगी। मेलाधिकारी ने बताया कि जले हुए पांच टेंटों के अलावा नष्ट हुए सामानों का मलबा हटाया जा रहा है, ताकि दोबारा टेंट लगाए जा सकें।