इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार व्याप्त होने तथा तानाशाही रवैया का आरोप लगाते हुए छात्राें ने बुधवार को कुलपति का घेराव किया। दृश्य कला विभाग में प्रदर्शनी का उद्घाटन करने पहुंचे कुलपति को छात्रों ने वहीं घेर लिया। पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हें खदेड़ा। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से की गई निलंबन की कार्रवाई से छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया है तथा उन्होंने तेज आंदोलन की घोषणा की है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार चरम पर है। उनका कहना था कि प्रोफेसर बीएन सिंह पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है। इसके बावजूद उन्हें प्रवेश प्रकोष्ठ का निदेशक बना दिया गया। छात्रों का यह भी कहना था कि इस वित्तीय अनियमितता की जांच की जिम्मेदारी रिटायर आईएएस श्रीराम यादव को दी गई है। जबकि, उनका बेटा प्रोफेसर बीएन सिंह के निर्देशन में शोध कर रहा है। ऐसे में प्रोफेसर बीएन सिंह की नियुक्ति भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला फैसला है जिसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। वे कुलपति के ओएसडी की नियुक्ति में भी गड़बड़ी का आरोप लगा रहे थे। छात्र वित्त अधिकारी के भी वित्तीय अनियमितता में शामिल होने का आरोप लगा रहे थे। छात्रों में कुलपति दफ्तर पर बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन पर रोक, छात्रसंघ भवन पर शैक्षणिक कार्यक्रमाें पर रोक लगाने के फैसले के खिलाफ भी नाराजगी रही।
घेराव पर निलंबन की कार्रवाई से नाराज सनत मिश्रा का कहना है कि यह आंदोलन दबाने की कोशिश है, लेकिन वे शांत नहीं बैठेंगे। अब और तेज आंदोलन होगा। प्रदर्शन करने वालाें में एबीवीपी के बैनर से छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ चुके सनत मिश्रा के अलावा हिमांशु पांडेय, अजीत यादव विधायक, राहुल चौरसिया, अनुभव उपाध्याय, राजेंद्र कुमार, कमलेश शर्मा आदि शामिल रहे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष केके राय ने कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू पर केंद्र सरकार और मानव संसाधन विकास मंत्री के एजेंट के तौर पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह पर फर्जी आरोप की आड़ में परेशान करने, पदाधिकारियाें के बीच फूट डालने क ा आरोप लगाते हुए कुलपति से इस्तीफे की मांग की।