डॉ. बंसल हत्याकांड में जुटी पुलिस ने बृहस्पतिवार को अस्पताल प्रबंधन से जुड़े एक डॉक्टर से एसटीएफ आफिस में तकरीबन आठ घंटे तक पूछताछ की। अस्पताल से जुड़े तमाम कागजातों की भी जांच की गई। देर शाम उन्हें छोड़ दिया गया, लेकिन शुक्रवार को फिर बुलाया गया है। उसके अलावा दो और कर्मियों को उठाकर पूछताछ की जा रही है। उन्हें छोड़ा नहीं गया है।
जीवन ज्योति अस्पताल मैनेजमेंट से जुड़े डॉ. राघवेंद्र को एसटीएफ ने गुरुवार को पूछताछ के लिए आफिस बुलाया। उनसे घटना के पहले और बाद की तफ्सील से जानकारी ली गई। इस दौरान एक बात पता चल रही है कि डॉ. बंसल को मवैया जाना था, लेकिन उनके मोबाइल पर कॉल आई जिसके बाद वह रुक गए। संभवत: किसी वीआईपी मरीज को देखने के लिए कॉल आई थी। इस बात की पुष्टि के लिए एसटीएफ ने अस्पताल से आज ही पूरा रिकार्ड मंगवाया। कितने मरीज घटना के समय मौजूद थे। उस दिन उन्होंने कितने मरीजों को देखा, उन सभी का विवरण चेक किया गया।
डॉ. राघवेंद्र अस्पताल का हिसाब किताब भी देखते हैं। उनसे तमाम खर्चों के बारे में पूछताछ की गई। डॉ. बंसल से जुड़े विवादों के बारे में भी उनसे पूछा गया। यह भी पूछा गया कि हाल के दिनों में कितने लोगों को नौकरी से निकाला और कितने नए लोगों को रखा गया है। उन सभी की सूची और मोबाइल नंबर मांगे गए हैं। घटना वाले दिन से जुड़ी लगभग सभी जानकारियों को आज मांगा गया था।
आठ घंटे बाद उन्हें छोड़ जरूर दिया गया, लेकिन शुक्रवार को कुछ और कागजातों के साथ दोबारा बुलाया गया है। डॉ. राघवेंद्र से इससे पहले भी पूछताछ हो चुकी है। इसके अलावा पुलिस ने दो कर्मचारियों को और उठाया है। उनसे भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने शक के दायरे में आए तमाम लोगों में दो ऐसे कर्मचारियों को चुना है जिनके कुछ न कुछ लिंक डॉॅ. बंसल के दुश्मनों से मिल रहे हैं। उनसे लगातार पूछताछ हो रही है।
इलाहाबाद (ब्यूरो)। जीवन ज्योति अस्पताल प्रबंधन ने घटना के समय डॉ. बंसल के साथ रहे अटेंडेंट शैलेंद्र पाठक को नौकरी से निकाल दिया है। पाठक वही शख्स है जिसकी मौजूदगी में कातिलों ने डॉ. बंसल को चार गोलियां मारी थीं। इसके बाद भी उसने कहा था कि ‘हत्यारों को मैंने नहीं देखा’। उसका कहना था कि गोली चलती देख वह मेज के नीचे छिप गया था। पुलिस ने उससे कई बार सख्ती से पूछताछ की थी, लेकिन उसने मुंह नहीं खोला।
वह बार बार एक ही चीज की रट लगाए रहा कि जब कातिल घुसे तो वह दूसरे काम में व्यस्त था। उसके बारे में यह भी जानकारी मिली है कि महर्षि विश्वविद्यालय से जुड़े एक शख्स ने ही उसे नौकरी पर रखवाया था। हत्या के तुरंत बाद भी उसकी गतिविधियां काफी संदिग्ध थी। इन्हीं सब बातों के मद्देनजर उसे नौकरी से निकाल दिया गया है। पुलिस भी उसे संदिग्ध मानकर जांच कर रही है।