केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल की रिश्तेदार की इलाज में लापरवाही के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अपना दल के अध्यक्ष आशीष सिंह की शिकायत पर सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा ने मंगलवार रात हर्ष हॉस्पिटल का निरीक्षण कर निर्देश दिया कि कंसलटेंट डॉ. मुकुल पांडेय सिर्फ ओपीडी में मरीज देखेंगे लेकिन रिपोर्ट आने तक मरीजों को भर्ती करने पर रोक रहेगी। इस कार्रवाई से उबले निजी डॉक्टर लामबंद हो गए हैं। एएमए ने हॉस्पिटल के खिलाफ की गई कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए बृहस्पतिवार को सीएमओ का घेराव करने का एलान किया है। उधर, सीएमओ की ओर से गठित टीम ने जांच शुरू कर दी है। शासन को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी।
इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) में बुधवार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल की अध्यक्षता में चिकित्सकों की आकस्मिक बैठक हुई। बैठक में हर्ष हॉस्पिटल और डॉक्टर मुकुल पर सीएमओ की कार्यवाही को एकतरफा बताते हुए कड़ी निंदा की गई। डॉक्टरों ने कहा कि हर्ष हॉस्पिटल में कुछ दिन पहले अत्यंत गंभीर अवस्था में एक रोगी लाया गया था, जो कि वेंटीलेटर उपलब्ध न होने के कारण मेडिकल कॉलेज के एसआरएन अस्पताल को रेफर कर दिया गया। बाद में रोगी की एसजीपीजीआई में मौत हो गई।
डॉक्टरों का दावा है कि इस मामले में अस्पताल की तरफ से कोई भी लापरवाही नहीं की गई। एएमए के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मरीज के रिश्तेदार सत्ताधारी दल से संबंधित होने के कारण मामले को हवा देकर डॉक्टर पर निराधार आरोप लगा रहे हैं। जबकि रोगी की चिकित्सा हर्ष हॉस्पिटल में हुई ही नहीं। इस तरह की घटनाएं निजी अस्पतालों पर राजनीतिक दबाव डालने की साजिश है, इसको आईएमए के सदस्य किसी भी रूप में बर्दाश्त नही करेगें। बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने प्रस्ताव पारित कर अविलंब हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती करने की सुविधा बहाल करने की मांग की है। उनकी सुनवाई नहीं हुई तो चिकित्सकों ने आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
एएमए के सचिव डॉ. त्रिभुवन सिंह ने कहा कि बृहस्पतिवार को इस मामले में सीएमओ का घेराव कर चिकित्सक अपनी बात रखेंगे। बैठक में डॉ. शार्दूल सिंह, डॉ. अनिल शुक्ला, डॉ. बीके मिश्रा, डॉ. आशुतोष गुप्ता समेत बड़ी संख्या में चिकित्सक शामिल हुए।
बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल की भांजी गरिमा सिंह को अपना दल अध्यक्ष आशीष सिंह मेडिकल चौराहे के पास स्थित हर्ष हॉस्पिटल ले गए थे। यहां उसे भर्ती ही नहीं किया गया। फिर उसे एसआरएन अस्पताल से पीजीआई रेफर किया गया, जहां उसका दम टूट गया। अपना दल के अध्यक्ष आशीष सिंह के मुताबिक हर्ष हॉस्पिटल में उसे भर्ती कर लिया गया होता तो उसकी जान बच जाती। शिकायत शासन और सीएमओ से की गई। सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा ने मंगलवार रात हर्ष हॉस्पिटल का निरीक्षण कर जांच कमेटी गठित कर दी। सीएमओ के मुताबिक रिपोर्ट आने तक न्यूरो सर्जन डॉ. मुकुल पांडेय (कंसलटेंट हर्ष हॉस्पिटल) ओपीडी में ही मरीज देखेंगे। उनकी अन्य सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।