नैनी जेल से देवरिया जिला जेल शिफ्ट किए गए पूर्व सांसद अतीक अहमद को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। जेल बदलने के खिलाफ उनकी याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी। याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ का कहना था कि यह राज्य सरकार का अधिकार है कि वह बंदी को किस जेल में रखना चाहती है। सरकार को किसी कैदी को एक जेल से दूसरी जेल में भेजने का अधिकार है। साथ ही किसी बंदी को यह हक नहीं है कि वह अपनी मर्जी की जेल में रहे।
उल्लेखनीय है कि अतीक अहमद शुआट्स मामले में जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ दर्ज अन्य मुकदमों में भी जमानतें निरस्त कराने की कार्यवाही चल रही है। प्रदेश सरकार ने हाल ही में निर्णय लेते हुए अतीक को नैनी जेल से हटाकर देवरिया जेल में शिफ्ट कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
इसी क्रम में शुआट्स के प्राक्टर रामकिशन सिंह द्वारा अपनी याचिका वापस लेने की मांग पर हाईकोर्ट ने सुनवाई टाल दी है। कोर्ट इस प्रकरण पर 18 अप्रैल को सुनवाई करेगी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि याची यदि अपनी याचिका वापस लेता है तो अदालत इस प्रकरण को जनहित याचिका में तब्दील कर सुनवाई करेगी। सुप्रीमकोर्ट ने सांसदों, पूर्व सांसदों आदि पर दर्ज आपराधिक मामलों की शीघ्र सुनवाई करने का आदेश दिया है। इसके अलावा सर्वोच्च अदालत अपराध पर अपराध करने वालों को जमानत नहीं दिए जाने के पक्ष में है।