यमुनापार के घूरपुर इलाके में बृहस्पतिवार सुबह रिटायर्ड फौजी शिवमूरत तिवारी ने अपनी बहू मंजू (35) को गोली से उड़ा दिया। हत्या के बाद ससुर ने घूरपुर थाने जाकर सरेंडर कर दिया। उसने पुलिस को तमंचा भी सौंप दिया। पुलिस को बताया कि जायदाद के लिए घरेलू कलह से आजिज आकर उसने यह आपराधिक कदम उठाया। उसे जेल भेज दिया गया है। महिला के पति ने कत्ल में अपनी मां, भाई और भयाहू पर भी साजिश रचने का आरोप लगाया है। पुलिस बाकी आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
सारंगापुर गांव निवासी शिवमूरत तिवारी रिटायर्ड फौजी हैं। उसके दो बेटों में बड़ा राजीव तिवारी भी कुछ साल पहले सेना से रिटायर होने के बाद एक सिक्योरिटी एजेंसी के लिए गार्ड का काम करता है। मौजूदा समय में उसकी तैनाती इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर स्थित बैंक शाखा में है। परिवार में पत्नी मंजू (35), बेटे अक्षत (15) और अतुल (12) हैं। उसका छोटा भाई राणा भी सेना में है। वर्तमान में वह पठानकोट में तैनात है। उसकी पत्नी भी वहीं हैं। बुधवार रात राजीव एक बारात में चाकघाट के आगे जवा इलाके में गया था। बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े छह बजे उसकी पत्नी मंजू गाय का दूध दूहने जा रही थी तभी किसी बात पर ससुर शिवमूरत से उसकी कहासुनी हो गई।
झड़प के दौरान ही शिवमूरत ने तमंचे से मंजू पर फायर कर दिया। हाथ में गोली धंसने पर वह चीखते हुए भागी तो ससुर ने पीछे से आकर उसे पकड़ा और एक और फायर कर दिया। गर्दन के ऊपर गोली धंसते ही वह गिरकर तड़पने लगी। फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास के लोग आ गए। मंजू के बेटे अक्षत ने पकड़ने की कोशिश की तो शिवमूरत उसे धक्का देकर घर से निकला और घूरपुर थाने जाकर पुलिस के सामने समर्पण कर दिया। उसने पुलिस को तमंचा तथा दोनों कारतूसों के खोखे सौंप दिए। उधर, मंजू को उठाकर एसआरएन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसकी मौत हो चुकी है।
फोन से उसके पति राजीव को खबर मिली तो वह घर आ गया। उसने पिता पर कत्ल तथा मां, छोटे भाई और भयाहू पर घटना की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। थानाध्यक्ष घूरपुर विजय प्रताप सिंह ने बताया कि जायदाद की वजह से बने घरेलू कलह के चलते यह कत्ल हुआ। यह परिवार मूल रूप से करेली के करेंहदा गांव का रहने वाला है। 1978 में बाढ़ आने पर शिवप्रताप ने सारंगापुर में रीवा मार्ग किनारे बड़ी जमीन खरीदकर मकान बनाया था। अब वह मकान बेचना चाह रहा था मगर बड़े पुत्र राजीव और बहू मंजू ने विरोध किया। उन्हें शक था कि संपत्ति बेचकर वह पैसे छोटे बेटे राणा को दे देगा।
घूरपुर थाने की पुलिस को जांच में पता चला कि यह कत्ल अचानक हुए झगड़े का नतीजा नहीं बल्कि सुनियोजित था। शिवमूरत ने इसी इरादे से तमंचा लाकर रखा था। उसे भी बुधवार को बेटे राजीव के साथ बारात जाना था, लेकिन बहू के कत्ल की साजिश के चलते ही उसने ऐन वक्त पर मना कर दिया। राजीव का भी आरोप है कि सुनियोजित ढंग से उसे बारात भेजकर मंजू का कत्ल किया गया। उधर, शिवमूरत को बहू के कत्ल का जरा भी पछतावा नहीं है। उसने पुलिस के सामने कहा कि अब मार तो डाला ही है बहू को। कोई बात नहीं। दस साल की सजा भी काट लूंगा।