जिला पंचायत सदस्य पद के लिए मतदान के दौरान मंगलवार को औद्योगिक क्षेत्र के ब्योहरा गांव में गुंडागर्दी करने वाले पूर्व ब्लाक प्रमुख चाका दिलीप मिश्र को पुलिस दूसरे रोज भी गिरफ्तार नहीं कर सकी। उसकी तलाश में पुलिस ने कई जगह छापे मारे मगर वह पकड़ में नहीं आ सका। उसके कई सहयोगी और समर्थक भी पुलिस दबिश के बाद से फरार हैं। पुलिस का कहना है कि उनकी हर हालत में जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। वैसे इलाके में तैनात पुलिसकर्मियों का कहना है कि दिलीप की सपा नेताओं से नजदीकी के कारण उसे अफसरों ने छूट दे रखी थी जिसकी वजह से वह पिछले कई रोज से लगातार गुंडगर्दी कर रहा था। पुलिस ने चुनाव आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया होता तो यह बवाल ही नहीं होता।
सपा में किसी अहम ओहदे पर नहीं होने के बावजूद दिलीप मिश्रा एक-दो बड़े नेताओं के साथ बने रहकर पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई से बचता रहता है। पूर्व मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी पर बम हमले की घटना में जेल से रिहा होने के बाद भी दिलीप पर कई आपराधिक आरोप लगे। कुछ माह पहले उसके खिलाफ एक बैंक अधिकारी को धमकाने का केस लिखकर पुलिस ने लवायन कला गांव स्थित निवास पर छापा मारा तो दिलीप फरार हो गया था। तब सीओ समरबहादुर के नेतृत्व में औद्योगिक क्षेत्र पुलिस ने अवैध असलहे-कारतूस बरामद कर दिलीप के करीब गुड्डू मिश्रा के खिलाफ भी शस्त्र अधिनियम के तहत केस लिखा था। मगर कुछ दिन बाद सब ठंडा हो गया।
पुलिस को भनक थी कि चुनाव के दौरान अपनी पत्नी अर्चना मिश्रा की जीत के लिए दिलीप मिश्रा किसी भी हद तक जा सकता है। इधर विरोधी प्रत्याशी और इलाके के लोग पुलिस अफसरों को बार-बार दिलीप की शिकायत भी कर रहे थे कि वह इलाके में गाड़ियों के काफिले में घूमकर वोटरों को धमका रहा है मगर अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। दिलीप के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की गई थी बस। अब अफसर भी मान रहे हैं कि दिलीप को नजरबंद करना चाहिए था मगर चूक हो गई। मंगलवार की शाम ब्योहरा गांव के बूथ पर मतपत्रों को फाड़ने पर हुएबवाल के बाद डीएम-एसएसपी के नेतृत्व में पुलिस ने छापा मारकर दिलीप के निवास से तीन फॉरच्यूनर, एक स्कार्पियो और एक सफारी सीज की थी। सफारी गाड़ी में शराब की बोतल भी मिली। 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया जिन्हें जेल भेज दिया गया है। मगर दिलीप समेत बाकी आरोपी फरार हैं। पुलिस टीम ने बुधवार को भी छापेमारी की लेकिन देर रात तक दिलीप नहीं मिला।