डॉ.बंसल हत्याकांड में एक बात तो पुलिस अधिकारी भी मान रहे हैं। वो यह कि इतनी दुश्मनी के चलते जान पर खतरा होने के बावजूद उनकी सुरक्षा में भयानक लापरवाही बरती गई। हॉस्पिटल में चार दर्जन कैमरे लगे हैं और इससे भी ज्यादा सिक्योरिटी गार्ड्स की तैनाती रहती है लेकिन घटना के वक्त कई कैमरे खराब मिले, जबकि चैंबर के बाहर से गार्ड नदारद था। यहां तक कि भागते शूटरों को कहीं रोकने का भी प्रयास नहीं किया। सनसनीखेज वारदात के बाद शनिवार से चौकसी बढ़ाते हुए पिछले गेट के बाद के दरवाजे पर ताला लगा दिया गया। जबकि मेन गेट पर एक गार्ड आने वाले हर शख्स के बारे में रजिस्टर में डीटेल दर्ज करने लगा।
जीवन ज्योति समेत कई हॉस्पिटल के निदेशक डॉ.एके बंसल पर कत्ल से पहले भी हमले और धमकी के कई मामले पहले सामने आ चुके थेे। सितंबर 2015 में उनकी गाड़ी पर बम से हमला किया गया था। कई लोगों से करोड़ों रुपये के विवाद में टशन के चलते डॉ.बंसल पर खतरा मंडरा रहा था। सबको यह पता था इसके बावजूद शूटर उनके कत्ल में कामयाब हो गए। इस खतरे और अक्सर मरीजों के तीमारदारों तथा कर्मचारियों के बीच टकराव की घटना के चलते हॉस्पिटल में दो एजेंसियों के सौ से ज्यादा सिक्योरिटी गार्ड्स की तैनाती है तो तीन शिफ्ट में तैनात होते हैं।
इसके अलावा चर्चा रही है कि डॉक्टर के साथ छह से आठ बाऊंसर भी रहते हैं। मगर बृहस्पतिवार शाम घटना के वक्त तो लगा ही नहीं कि डॉक्टर पर खतरे के चलते हॉस्पिटल में कोई सुरक्षा और चेकिंग की व्यवस्था है। शूटर पिछले गेट से बेरोकटोक दाखिल हुए, फिर दरवाजा खोलकर चैंबर में घुसे और डॉ.बंसल को गोलियां मारने के बाद पिछले रास्ते से धड़ल्ले से फरार हो गए। न किसी कर्मचारी ने रोका और न सिक्योरिटी गार्ड ने टोका या पकड़ने का प्रयास किया। चैंबर के दरवाजे से भी वह सिक्योरिटी गार्ड नदारद था जिसकी वहां ड्यूटी लगी थी।
डॉ.बंसल के कत्ल की घटना में सुरक्षा की भारी लापरवाही उजागर होने के तीसरे रोज हॉस्पिटल में व्यवस्था में बदलाव किया गया। मेन गेट पर दो गार्ड बाहर लगा दिए गए जो किसी के आने पर गेट खोलते और बंद करते। गेट के भीतर एक गार्ड को कुर्सी पर बैठाया गया जो अंदर आने वाले हर व्यक्ति के बारे में रजिस्टर में नाम-पता और फोन नंबर दर्ज कर रहा था। पिछले गेट पर भी गार्ड आने-जाने वालों पर नजर रख रहा था। मेन गेट के बाद वाले दरवाजे में भीतर से ताला लगा दिया गया। इसी दरवाजे को पार कर दोनों शूटर मेन गेट से निकलकर फरार हो गए थे। कर्मचारियों ने बताया कि खराब सीसीटीवी कैमरों को भी दुरुस्त कराया जा रहा है।
एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने शहर और देहात से शनिवार को सात संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है। उन्हें अलग स्थानों पर रखकर पूछताछ की जा रही है। अफसरों का कहना है कि अब तक 25 से ज्यादा लोगों को संदेह के आधार पर उठाकर पूछताछ की जा चुकी है मगर कोई सुराग नहीं मिल सका है। पुलिस फरार शूटरों नीरज वाल्मीकि और अतुल पांडेय को खोज रही है। नीरज तो दो ठेकेदारों के कत्ल के बाद मोस्टवांटेड लिस्ट में है लेकिन पुलिस उसे नहीं दबोच सकी।
हत्याकांड की जांच में जुटी एसटीएफ तथा क्राइम ब्रांच को उम्मीद है कि कत्ल के तार यमुनापार से जुड़े हैं और सुराग उधर से ही मिल सकते हैं। पुलिस का मानना है कि शूटर यमुनापार के ही है। अगर यमुनापार के रहने वाले नहीं तो संभव है कि इसी तरफ पनाह ली हो। इस क्षेत्र के शूटरों की लोकेशन चेक की जा रही है। जिस राजा पांडेय पर हमला कराने का शक जताया गया वह भी यमुनापार के करछना इलाके का रहने वाला है। हालांकि वह दो महीने पहले गोलियां मारे जाने के बाद से एसआरएन अस्पताल में भर्ती है। उसकी हालत गंभीर है। उसके बारे में चर्चा है कि उसने कुछ दिन पहले इलाज के बाद जीवन ज्योति हॉस्पिटल में पैसों के विवाद में डॉ.बंसल को धमकी दी थी। इस वजह से एसटीएफ और क्राइम ब्रांच उसके गुर्गों को खोज रही है। हालांकि जांच की इस लाइन को कमजोर माना जा रहा है।