जमुना क्रिश्चियन कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य आरके गवन की खुदकुशी के मामले में ‘ओरिजिनल सुसाइड नोट’ पर विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस का कहना है कि घरवालों ने उन्हें मूल कॉपी का फोटोस्टेट मुहैया कराया है। जब तक मूल कॉपी और उनकी पुरानी डायरी या नोट्स उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे, जांच नहीं की जा सकती। मंगलवार को भी पुलिस ने घरवालों से बातचीत की। घरवालों ने सुसाइड नोट में दर्ज तीनों आरोपियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई को कहा है।
आरके गवन खुदकुशी मामले में ‘ओरिजिनल सुसाइड नोट’ का पेच फंस गया है। दरअसल, घरवालों ने अभी पुलिस को सुसाइड नोट का फोटोस्टेट ही मुहैया कराया है। इंस्पेक्टर निशिकांत राय का कहना है कि हैंड राइटिंग का मिलान मूल कॉपी से ही किया जाएगा। घरवालों ने अभी तक मूल कॉपी उपलब्ध नहीं कराई है। दूसरी ओर आरके गवन के बेटे धीरज का कहना है कि जिस तरह से उन्हें और उनके परिवार की घेरेबंदी की जा रही है, वह सुसाइड नोट को स्कैन कराके ही पुलिस को सौंपेंगे। आरोपी बेहद ताकतवर हैं। वह सुसाइड नोट में छेड़छाड़ कर सकते हैं। फिलहाल, मूल कापी की स्कैनिंग करा दी गई है। बुधवार को पुलिस को सौंप दिया जाएगा।
इसके अलावा पुलिस ने आरके गवन के पुराने नोट्स और सिग्नेचर मांगे हैं। धीरज ने बताया कि नोट्स तो मिल गए हैं, लेकिन कोई भी घर में अपना सिग्नेचर नहीं रखता है। पुलिस से यह बात बताई गई है। धीरज का आरोप है कि उनका परिवार दहशत में है। अधिकारियों से सुरक्षा की भी मांग की गई थी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। पुलिस ने रुद्रनारायण पाठक की एफआईआर पर उनके पिता आरके गवन और शुआट्स के विनोद बी लाल के खिलाफ चार्जशीट लगा दी और आरोपियों को छोड़ दिया। इसके बाद से ही पिता बहुत परेशान थे। उन्होंने विवेचक से कहा था कि अगर 78 साल की उम्र में उन पर भूमाफिया होने का दाग लगाया गया तो वह सुसाइड कर लेंगे। अंत में हारकर उन्होंने यही किया।
आरके गवन के बेटे धीरज गवन का कहना है कि उनके परिवार की सुरक्षा के लिए पुलिस कुछ नहीं कर रही है। उन्होंने अधिकारियों से लाइसेंस के लिए भी बात की थी। कोई सुनवाई नहीं हुई। वह जल्द ही परिवार के साथ मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से मिलकर गुहार लगाएंगे।